भगवान ऋषभदेव निर्वाणभूमि
भगवान ऋषभदेव निर्वाणभूमि कैलाशपर्वत की मंगल आरती -प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती तर्ज—मैं तो………… मैं तो आरती उतारूँ रे, कैलाशगिरिवर की। जय जय कैलाशगिरि, जय जय जय-२।।टेक.।। युग की आदी में प्रभु ऋषभदेव, इस गिरि पर पहुँचे।इस गिरि… अपने योगों का करके निरोध, मुक्तिपुरी पहुँचे।। मुक्तिपुरी…… इन्द्रों ने झूम-झूम, नृत्य किया घूम-घूम, उत्सव मनाया रे, हो निर्वाण…