मंगलाचरण
मंगलाचरण….. चन्द्रप्रभो वागमृतांशुभिर्यो, जनान् प्रपुष्यन्नकलंकयुक्त:। न चापि दोषाकरतां प्रयाति, सदा स्तुवे तं भवतापशून्यं।। ”तीर्थंकर चन्द्रप्रभदेव परिचय” इस मध्यलोक के पुष्कर द्वीप में पूर्व मेरु के पश्चिम की ओर विदेह क्षेत्र में सीतोदा नदी के उत्तर तट पर एक ‘सुगन्धि’ नाम का देश है। उस देश के मध्य में श्रीपुर नाम का नगर है। उसमें इन्द्र…