मुनिसुव्रतनाथ भगवान भजन
मुनिसुव्रतनाथ भगवान भजन
मुनि श्री जयकीर्ती गुरुदेव जी मुनि श्री का नाम मुनि श्री जयकीर्ती गुरुदेव जी गृहस्थावस्था का नाम सतीश जैन जन्मतिथि व दिनांक 16-11-1971 जन्मस्थान सागर (म .प्र .) जाति परवार जैन माता का नाम श्रीमती सोनाबाई जैन पिता का नाम श्री कोमल चंद जैन लौकिक शिक्षा bsc ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक 5-4-1997 में प्रतिमा व्रत, स्थान …
आचार्य श्री सुलभसागर महाराज जी मुनि श्री का नाम आचार्य श्री सुलभसागर जी गृहस्थावस्था का नाम अशोक जैन जन्मतिथि व दिनांक 29-12-1959 जन्मस्थान पिडावा, राज. जाति जैन माता का नाम श्रीमती शांतिबाई जैन पिता का नाम श्री इन्दमल जैन लौकिक शिक्षा m.com. ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक 2013 में प्रतिमा व्रत 2013 में मुनि दीक्षा…
मुनि श्री विभास्वरसागर महाराज जी मुनि श्री का नाम श्रमण विभास्वर सागर जी गृहस्थावस्था का नाम बा.ब्र.विजय भैया जन्मतिथि व दिनांक 4-7-1979 जन्मस्थान ललितपुर(उ. प्र.) जाति माता का नाम श्रीमती कमलादेवी जैन पिता का नाम श्री श्रीचन्द्र जैन लौकिक शिक्षा मिडिल ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक 3-5-2003 में प्रतिमा व्रत ऐलक दीक्षा,स्थान 13-2-2006,श्रवणबेलगोला,कर्ना. ऐलक दीक्षा गुरु गणाचार्य…
मुनि श्री शुद्धोपयोगसागर महाराज जी मुनि का नाम मुनि श्री शुद्धोपयोग सागर जी गृहस्थावस्था का नाम बा.ब्र.अभिनंदन भैया जन्मतिथि व दिनांक 26-2-1997 जन्मस्थान टीकमगढ(म. प्र.) जाति गोलापूर्व जैन माता का नाम श्रीमती गुलाबबाई जैन पिता का नाम श्री उत्तम चन्द्र जैन लौकिक शिक्षा B.A. ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक 2016 में प्रतिमा व्रत 2017 कुंथलगिरि में…
मुनि श्री श्रम सागर महाराज जी मुनि मुनि श्री श्रम सागर जी गृहस्थावस्था का नाम बा.ब्र.संयम भैया जन्मतिथि व दिनांक 6-5-2004 जन्मस्थान चिरमिरि(छ. ग.) जाति परवार जैन माता का नाम श्रीमती राखी जैन पिता का नाम श्री सुनील कुमार जैन लौकिक शिक्षा 12वीं ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक 14- 12-2022 में प्रतिमा व्रत 14- 12-2022…
श्री ज्येष्ठ जिनवर पूजा नाभिराय कुल मण्डन मरुदेवी उर जननं। प्रथम तीर्थंकर गाये सु स्वामी आदि जिनं।। ज्येष्ठ जिनेन्द्र न्हवाऊँ सूरज उग्र मणी। सुवरण कलशा भराऊँ क्षीरसमुद्र भरणी।।१।। जुगला धर्म निवारण स्वामी ऋषभ जिनम्। संसार सागर तारण सेविय सुर गहनं।।ज्येष्ठ.।।२।। इन्द्र इन्द्रानी देवा देवी बहु मिलनी। मेरु जिनेन्द्र न्हवायो महोत्सव जै करनी।।ज्येष्ठ.।।३।। गणधर, ऋषिवर, यतिवर,…
श्री ज्येष्ठ जिनवर अभिषेक रचयित्री-आर्यिका चंदनामती -दोहा- भोगभूमि के अंत में, हुआ आदि अवतार। आदिब्रह्म आदीश ने, किया जगत उद्धार।। -शेर छंद- जय जय प्रभो वृषभेश ने अवतार जब लिया। इंद्रों ने अयोध्या को स्वर्गसम बना दिया।। सुरपति ने मेरु पे जिनेन्द्र न्हवन किया था। क्षीरोदधी का जल परम पवित्र हुआ था।।१।। पितु नाभिराय के…