कविवर परिमल हिंदी साहित्य के संवर्धन में जैन कवियों का विशिष्ट योगदान रहा है “उन्होंने इस काव्य वाटिका की शोभा को द्विगुणित किया है और हिंदी को जनप्रिय बनाया है “ऐसा ही एक ग्रन्थ वरहिया जाति के रत्न कुम्हरिया गौत्रोत्पन्न महाकवि परिमल्ल का ‘श्रीपाल-चरित’है ” श्रीपाल का कथानक जैन जगत में बहुत लोकप्रिय है “श्रीपाल…
वरहिया जैन इतिहास अतीत का प्रामाणिक भौतिक दस्तावेज होता है जो अनेक लिखित-अलिखित साक्ष्यों के दृश्य अदृश्य सूत्रों से गुंथा होता है “जिन साक्ष्यों का भौतिक और दृश्य अस्तित्व होता है ,यत्र-तत्र बिखरा होने के कारण उनका संकलन करना भी एक दुष्कर कार्य है लेकिन अदृश्य सूत्रों को अत्यंत सतर्कतापूर्वक और पारस्परिक संगति का निर्वाह…
पं.गोपालदास वरैया जैन-जाग्रति के पुरस्कर्ताओं की पंक्ति में एक उल्लेखनीय नाम स्यादवादवारिधि,वादीगजकेशर,न्यायवाचस्पति,गुरुवर्य पंडित गोपालदास वरैया का है “पंडित जी का जन्म ई.1867 में आगरा(उ.प्र.)में श्री लक्ष्मण दास जी जैन के घर हुआ था “आपके पिता की आर्थिक स्थिति बहुत सामान्य थी “जिसके कारण उन्होंने साधारण अंग्रेजी स्कूल में माध्यमिक स्तर तक ही शिक्षा प्राप्त की…