छह द्रव्यों का वर्णन!
[[श्रेणी:द्रव्यानुयोग]] द्रव्य का लक्षण-द्रव्य का लक्षण सत् है अथवा गुण२ और पर्यायों के समुदाय को द्रव्य कहते हैं। द्रव्य छह होते हैं-जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल।
[[श्रेणी:द्रव्यानुयोग]] द्रव्य का लक्षण-द्रव्य का लक्षण सत् है अथवा गुण२ और पर्यायों के समुदाय को द्रव्य कहते हैं। द्रव्य छह होते हैं-जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल।
[[श्रेणी: अमूल्य प्रवचन]] भव्यात्माओं ! परमपूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा महापुराण ग्रन्थ पर किये गये प्रवचन यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं , इन्हें पढ़कर आप सब महापुराण का ज्ञान प्राप्त करें और इन प्रवचनों की वीडियो सीडी भी जम्बूद्वीप – हस्तिनापुर से मँगवा सकते हैं ।
दस्त (अतिसार) कारण — बासी भोजन, दूषित जल पीना, ऋतु परिवर्तन, पाचन में परेशानी, पेट में कीड़े होना। लक्षण — दस्त आने से पहले पेट में गुड़गुड़ाहट, दर्द, खट्टी डकारें आना इत्यादि। उपचार १. बच्चों को दस्त होने पर माँ के दूध में ३ ग्राम अतीस घिस कर दें। दस्त रूक जायेंगे। २. शुद्ध केसर…
दूध —घी के गुण दूध में प्रोटीन, शर्करा, वसा, खनिज लवण और अनेक विटामिन प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं । चरक संहिता में इसे ‘‘पय: पानं यथामृतम’’ कहा गया है। दूध के अन्य पदार्थ — दूध से पनीर, घी, मावा (खोवा) दही छाछ (मट्ठा) क्रीम, मक्खन इत्यादि पदार्थ भी तैयार किये जाते हैं।…
श्री बीस तीर्थंकर पूजा भाषा दीप अढ़ाई मेरु पण, अरु तीर्थंज्र्र बीस। तिन सबकी पूजा करूँ, मनवचतन धरि शीस।। ॐ ह्रीं विद्यमानविंशतितीर्थंकरा:! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं विद्यमानविंशतितीर्थंकरा:! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं। ॐ ह्रीं विद्यमानविंशतितीर्थंकरा:! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं। अथाष्टक इन्द्र फणीन्द्र नरेन्द्र, वंद्य पद…
–संत श्री एलाचार्य [तिरुवल्लुवर] द्वारा रचित ग्रंथ – “ तिरक्कुरल [ कुरल- काव्य ] “यह तमिल भाषा में रचित नीति-ग्रंथ है / इसका हिंदी अनुवाद स्व.प.गोविंदराम जैन शास्त्री ने पू. आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी की प्रेरणा से किया है/ इस ग्रंथ मे मानव जीवन के सर्वांगीण- निर्माण की प्रेरक सूक्तियों एवं मूलमन्त्रों को 108…
जैन इन्साइक्लोपीडिया : जैन समाज हेतु एक विशिष्ट उपलब्धि १. www.encyclopediaofjainism.com दिगम्बर जैनधर्म से सम्बन्धित समस्त विधाओं यथा—संस्कृति, साहित्य, तीर्थ एवं मंदिर, परम्पराएँ, साधु—साध्वियाँ, पर्व, पूजाएँ, विद्वान, संस्थाएँ, ज्योतिष, वास्तु इत्यादि को परिष्कृत, समग्र एवं प्रामाणिक रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध कराने हेतु एक महत्वपूर्ण कार्य योजना है। २. दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप—हस्तिनापुर…