भगवान सुपार्श्वनाथ चालीसा
श्री सुपार्श्वनाथ चालीसा दोहा चार घातिया कर्म को, नाश बने अरिहंत। अष्टकर्म को नष्टकर, बने सिद्ध भगवंत।।१।। छत्तिस मूलगुणों सहित, श्री आचार्य महान। पच्चिस गुण संयुक्त हैं, उपाध्याय गुरु जान।।२।। गुण अट्ठाइस साधु के, ये पाँचों परमेष्ठि। इनको वंदूँ मैं सदा, श्रद्धा भक्ति समेत।।३।। बिना सरस्वती मात के, होता नहिं कुछ ज्ञान। इसीलिए उनको करूँ,...