भगवान अजितनाथ वन्दना
श्री अजितनाथ वन्दना गीताछंद इस प्रथम जम्बूद्वीप में, है भरतक्षेत्र सुहावना। इस मध्य आरजखंड में, जब काल चौथा शोभना।। साकेतपुर में इन्द्र वंदित, तीर्थकर जन्में जभी। उन अजितनाथ जिनेश को, मैं भक्ति से वंदूं अभी।।१।। शंभु छंद जय जय तीर्थंकर क्षेमंकर, जय समवसरण लक्ष्मी भर्ता। जय जय अनंत दर्शन सुज्ञान, सुख वीर्य चतुष्टय के धर्ता।।...