भुतविषय नय!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघातन-परिशातन कृति –Samghaatana-parishaatana Kriti. Assimilation and dissociation of the molecules of body. पांचो शरीरों में से विवक्षित शरीर के पुद्गल स्कंधों का आगमन और निर्जरा का एक साथ होना संघातन- परिशातन कृति कही जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सद्यजात – Sadyajaata. Immediately produced or prepared. तत्काल उत्पन्न।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा लब्धि :Synonym of Shruggyan (scriptural knowledge.) श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलमति – Vipulamati. A type of telepathic knowledge (Manah Paryay Gyan). मन: पर्यय ज्ञान के दो भेदों में दूसरा भेद; जो ज्ञान दूसरे के मन में स्थित सरल और कुटिल सब बातों को जान लेता है ” अर्थात् चिन्तित, और अर्ध – चिन्तित को भी जान लेता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धमति – Shuddhamati. Name of the 22nd Tirthankar (Jaina-Lord) of past era. भूतकालीन 22 तीर्थंकर “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंगल:State of auspiciousness, name of a planet (Mars), Name of a deity of Saumnas Gajdant mountain and its summits. जो पाप रूपी मल को गलाता है अथवा जो सुख या पुण्य को लाने वाला है वह मंगल है (पंचनमस्काररूप णमोकार मंत्र समस्त मंगलो में प्रथम मंगल कहा जाता है), एक ग्रह का नाम,…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्जरा : == बंधपदेशग्गलणं निज्जरणं इदि जिणेहिं पण्णत्तं। जेण हवे संवरणं तेण दुणिज्जरणमिदि जाणे।। —वारस अणुवेसवा : ६६ बंधे हुए कर्म—प्रदेशों के क्षरण को निर्जरा कहा जाता है। जिन कारणों से संवर होता है, उन्हीं कारणों से निर्जरा होती है। यथा महातडागस्य, सन्निरुद्धे जलागमे। उत्सिंचनया तपनया, क्रमेण शोषणा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विग्रह – Vigraha.: Quarrel,Separation. कलह, विच्छेद ” विग्रह – Vigraha.: Getting the body through transmigration. देह; नामकर्म के उदय से शरीरों के योग्य पुद्गलों का ग्रहण विग्रह कहलाता है “