विभाव पुद्ग्ल!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव पुद्ग्ल – Vibhava Pudgala. Assimilated particles of any pudgal (matter). पुद्ग्ल द्रव्य की दो भेदों में एक भेद; परमाणु ‘स्वभाव पुद्ग्ल’ और स्कंध ‘विभाव पुद्ग्ल’ हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव पुद्ग्ल – Vibhava Pudgala. Assimilated particles of any pudgal (matter). पुद्ग्ल द्रव्य की दो भेदों में एक भेद; परमाणु ‘स्वभाव पुद्ग्ल’ और स्कंध ‘विभाव पुद्ग्ल’ हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतबली – Bhutabali. Name of a great Acharya, the disciple of Acharya Arhadvali. एक आचार्य (ई. ६६-१५६)जिनके दीक्षा गुरु आचार्य अर्ह्द्वली और शिक्षा गुरु ध्ररसेन थे ” इन्होनें षट्खंडागम के सूत्रों की रचना की है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वोपशमन – Sarvopashamana. Subsidence of all 28 Karmic Nature of delusion. मोहनीय कर्म की 28 प्रकृतियों का उदयाभाव करना । यह धर्मध्यान का फल है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यशस्तिलकचंपू–Yashastilakchampu. Name of a composition composed by Acharya Somdev. आचार्य सोमदेव द्वारा ई.943–968 में रचित संस्कृत भाषाबद्ध चंपू काव्य जिसमे यशोधर महाराज का जीवन चित्रित किया गया है”
जम्बूवृक्षस्थल Region of Jambuvriksha (a super tree). जम्बूवृक्ष सामान्य स्थल ; ५०० योज.अन विस्तार युक्त है , मध्य में ८ योजन एवं किनारों पर २ कोस मोटा है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वानंत – Sarvaananta. All infinite. अनंत का एक भेद । आकष को धन रूप से देखने पर उसका अंत नहीं पाया जाता इसलिये उसे सर्वानंत कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्रत्युंजय यंत्र–Mratyunjay. A type of metallic plate engraved with some auspicious mystic words. 48 यंत्रों में एक; जिसमे मृत्तिका नयन मन्त्र के अक्षर, शब्द मंत्रो की रचना कोष्ठक आदि बनाकर चित्रित की गयी है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसंघ – Sarvasangha. Name of the 58th chief disciple of Lord Rishabhdev. भगवान ऋषभदेव के 58 वें गणधर ।
चतुर्थच्छेद Number of times that a number can be divided by 4. किसी संख्या को ४ से जितनी बार भाग दिया जा सके ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वमत – Sarvamata. Something universally accepted. जो सर्वरूप मान्य हो ।