सर्प!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्प – Sarpa. A snake a serpent, a significant symbol of lord Parshvanath, The presiding deity of a lunar Ashlesha. भगवान पाश्र्वनाथ का चिन्ह, सातवें नक्षत्र आश्लेषा का अधिपति देवता।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्प – Sarpa. A snake a serpent, a significant symbol of lord Parshvanath, The presiding deity of a lunar Ashlesha. भगवान पाश्र्वनाथ का चिन्ह, सातवें नक्षत्र आश्लेषा का अधिपति देवता।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यत्याचार–Yatyachar. Name of a book written by Acharya Padmanandi – 7, Well conduct of saints, Great treatises containing description of saints’ conduct. आचार्य पद्मनंदी -7(ई. 1305) की एक रचना,साधुओ के आचार-विचार को यत्याचार कहते है” जिन ग्रंथों में यतियों के आचार आदि का वर्णन हो वे भी यत्याचार कहलाते है” जैसे- मूलाचार, भगवती…
चित्सुखाचार्य Name of a promoter of Vedant literature. वेदान्त स्दाहित्य प्रवर्तक (ई. १२५०) जिन्होंने ‘चित्सुखी’ नामक ग्रन्थ रचा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सरल – Sarala. Simple, easy, straight, honest, name of the initiation tree of Lord Abhinandannath. सीधा, ईमानदार, तीर्थकर अभिनंदन नाथ का दीक्षा वृक्ष, (अपरनाम असन वृक्ष)।
चारित्रभूषण Name of an Acharya, spiritual teacher of Acharya Vidyanandi. इनके मुख से ही देवागम स्तोत्र का पाठ सुन्कर्श्री विद्यानंदि आचार्य जिन दीक्षित हो गए थे . समय -ई. ७५०-८१५ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्फटिक – Spatika. A crystal, quartz, name of the 18th indrak of saudharma heaven, a summit of Gandhmdan Vijayardh mountain, the summit of Manushottar & Ruchak mountains.एक प्रकार की कांच के समान पास्दर्शी मणि, सौधर्म स्वर्ग का 18वां इन्द्रक, गंधमादन विजयार्ध का एक कूट, मानुषोत्तर पर्वतस्थ व रुचक पर्वतस्थ एक-एक कूट।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == निर्लेप : == चरदि जदं जदि णिच्चं, कमलं व जले णिरुवलेवो। —प्रवचनसार : ३-१८ यदि साधक प्रत्येक कार्य यतना से करता है, तो वह जल में कमल की भाँति निर्लेप रहता है।
च्यावित शरीर Cast off body. कदलीघात के द्वारा आयु के छिनना हो जाने से छूटे हुए शरीर को च्यावित शरीर कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष नाम विधान – Sparssana Naama Vidhaana. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == द्रव्य : == आकाशकालजीवा:, धर्माधर्मौ च र्मूितपरिहीना:। मूर्तं पुद्गलद्रव्यं, जीव: खलु चेतनस्तेषु।। —समणसुत्त : ६२६ आकाश, काल, जीव, धर्म और अधर्म द्रव्य अर्मूितक हैं। पुद्गल द्रव्य र्मूितक है। इन सबमें केवल जीव द्रव्य ही चेतन है। दव्वं सल्लक्खणयं उप्पादव्वयधुवत्तसंजुत्तं। —पंचास्तिकाय : १० द्रव्य का लक्षण सत् है और वह सदा…