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[[श्रेणी:शब्दकोष]] संश्लेष – Sanshlesa. Act of synthesising or combining. मिलना ” स्निग्धत्व और रुक्षत्व गुण से अणु आदि का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संश्लेष – Sanshlesa. Act of synthesising or combining. मिलना ” स्निग्धत्व और रुक्षत्व गुण से अणु आदि का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरावती – Sharaavatee. The ancient name of present Shravasti (the birth place of Lord sambhavnath) near district baharaich (U.P.). भगवान संभवनाथ की जन्मभूमि श्रावस्ती का अपरनाम, यह उत्तरप्रदेश के बहराइच जिले में है “
देशसंधि The joining land of two countries (borders). दो देशों की सीमा भूमि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परलोक भय:A kind of insecurity (fear) related to the future birth. सप्त भयों में एक भय, परभव मेें न मालूम क्या होगा ऐसा भय होना ।
एक अजीव- एक अजीव कषाय Passion related to soul and non soul matters. निक्षेप की अपेक्षा कशाय के भेद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकगिरी–Yamakgiri. See – Yamak. देखे–यमक” गोल, उचाई 1000 योजन, नीचे की चौड़ाई 1000योजन, ऊपर की चौड़ाई 500 योजन” इन पर इसी नाम के धारक देव रहते है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्नेह : == नियलेहि पुरिओ च्चिय वच्चइ पुरितो जहिच्छियं देसं। एक्कं पि अंगुलमिणं, न जाइ घणनेह—पडिबद्धो।। —पउमचरिउ : ५६९ जंजीरों से बंधा हुआ मनुष्य इच्छानुसार देश में जा सकता है, पर घने स्नेह से जकड़ा हुआ मनुष्य एक अंगुल भी नहीं जा सकता।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य काल – Saamaanya kaala. Common time. वस्तु का विधि रूप वर्तन सामान्य काल है और निषेध स्वरूप विशेष काल है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == दया : == दयामूलो भवेद्धर्मो दया प्राण्यनुकम्पनम्। दयाया: परिरक्षार्थं गुणा: शेषा: प्रर्कीितता:।। —आदिपुराण : ५-२७ धर्म का मूल दया है। प्राणी पर अनुकम्पा करना दया है। दया की रक्षा के लिए ही सत्य, क्षमा शेष गुण बताए गए हैं। मा हससु परं दुहियं कुणसु दयं णिच्चमेव दीणम्मि। —कुवलयमाला :…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमावगाढ़ सम्यग्दर्शन:Right perception with deep predilection.केवलज्ञान परमात्मा के जो निर्मल क्षयिक सम्यक्त्व होता है अथवा केवलज्ञान के द्वारा देखे गये पदार्थे के विषय मेें जो उत्कृष्ट रूचि होती है।