सुमुखी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमुखी – Sumukhee. A beautiful lady, Name of the 49 th city in the south of Vijayardha mountain. सुन्दर मुख वाली स्त्री, विजयार्ध पर्वत की दक्षिण श्रेणी की 49 वीं नगरी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमुखी – Sumukhee. A beautiful lady, Name of the 49 th city in the south of Vijayardha mountain. सुन्दर मुख वाली स्त्री, विजयार्ध पर्वत की दक्षिण श्रेणी की 49 वीं नगरी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक ॠध्दि – Parinamika Rddhi. A type of supernatural power. बुध्दिॠध्दि के १८ भेदों में १५वें भेद अष्टांग महानिमित्त के तीन भेदों में तीसरा भेद- जिसके प्रभाव से निज- निज जाति विशेषों में बुध्दि उत्पन्न होती है (धवला पुस्तक ९ से) “
चतुराश्रम The four stages of life. ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वांप्रष्ठ व सन्यास आश्रम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकनाभी – Loknaabhi.: The another name of Sumeru mountain which is situated in centre of all three Loks as the navel. सुमेरु पर्वत का एक अपरनाम क्योंकि ये नाभि के समान तीन लोक के बीच (मध्यलोक )में स्थित है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारंचिक परिहार प्रायश्चित – Paramcika Parihara Prayascitta. Repentance for the saints, criticiser of religion or other good religious matters. संघ, शास्त्र, देव आदि की निंदा करने वाले एवं धर्म में झूठे दोष लगाने वाले मुनियों को दिया जाने वाला प्रायश्चित “
उनचास Forty-nine. एक संख्या सहनानी रज्जूप्रतर रज्ज2(7)2=49। एक बार सम्मेदशिखर की वंदना करने वाला भव्य जीव अधिकतम 49 भव में नियम से मोक्ष प्राप्त करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेख क्रिया- Lekh kriyaa.: Writing activity, Deceitful or fraudulent writing. लेखन कार्य, सत्याणुव्रत का एक अतिचार; छल से लेख लिखना इसे कूट लेख क्रिया कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापमोचन – Papamocana. Liberation from sins. पापों से मुक्ति “
दर्पण Mirror; an auspicious device which is to be kept near Lord idol. शीशा, एक मंगल, अकृत्रिम प्रतिमाओं के समीप सिथत 108 मंगल द्रव्यों में एक मंगल द्रव्य।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाघस्थितिकल्प – Padyasthitikalpa. To stay at one place only for 4 months in rainy season (reg. saint). वर्षा काल में चार मास तक एक ही स्थान पर रहना अर्थात् भ्रमण का त्याग करना, यह ‘पाघ’ नाम का १०वां स्थितिकल्प है “