नागसेन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागसेन – Nagasena Name of the saint possessing knowledge of 11 Angas nad 10 Purvas, a writer of ‘Tattvanushaan. भद्रबाहु प्रथम के पश्चात् पाँचवे 11 अंग व 10 पूर्व धारी मुनि (वी.नि. 229-247 )” इनका अपरनाम नाग है ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागसेन – Nagasena Name of the saint possessing knowledge of 11 Angas nad 10 Purvas, a writer of ‘Tattvanushaan. भद्रबाहु प्रथम के पश्चात् पाँचवे 11 अंग व 10 पूर्व धारी मुनि (वी.नि. 229-247 )” इनका अपरनाम नाग है ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूपाल चतुर्विशतिका – Bhupala chaturvishtika. Name of a treatise written by pandit Ashadhar. पं. आशाधर (ई. ११७३-१२४३) कृत एक ग्रंथ का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार दर्शनार्य –VistaraDarsanarya. A type of noble persons. दर्शनार्य १० प्रकार के होते हैं उनमें से विस्ताररूचि वाले सम्यग्द्रष्टि को विस्तार दर्शनार्य कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भानुमालिनी – Bhanumalini. Name of a super power possessed by Ravana. रावण को प्राप्त एक विधा “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == समभाव : == जस्स ण विज्जदि रागो, दोसो मोहो व सव्वदव्वेसु। णासवदि सुहं असुहं, समसुहदुक्खस्स भिक्खुस्स।। —पंचास्तिकाय : १४२ जिस साधक का किसी भी द्रव्य के प्रति राग, द्वेष और मोह नहीं है, जो सुख—दु:ख में समभाव रखता है, उसे न पुण्य का आस्रव होता है और न…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धद्रव्यार्थपर्याय नैगमनय – Shuddha Dravyaarthaparyaaya Naigama Naya. A standpoint related to distinct & indistinct description of a pure matter (Jiva) & one of its Artha Paryay. शुद्धद्रव्य व उसकी किसी एक अर्थपर्याय को गौण-मुख्यरूपसे विषय करने वाला नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुनर्जन्म – Punarjanma. Reincarnation, rebirth. पुनः या दुबारा जन्म होना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == हिंसा : == न हि तद्घातनिमित्तो, बन्धो सूक्ष्मोऽपि देशित: समये। मूच्र्छा परिग्रह: इति च, अध्यात्मप्रमादतो भणित:।। —समणसुत्त : ३९२ जैसे अध्यात्म (शास्त्र) में मूच्र्छा को ही परिग्रह कहा गया है, वैसे ही उसमें प्रमाद को हिंसा कहा गया है। एदे पंचपओगा किरियाओ होंति हिंसाओ। —भगवती आराधना : ८०७…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तिशिला–Muktishila. Place of salvation. सिद्ध शिला; ईषत् प्राग्भार अष्टमपृथ्वी केमध्य छत्र के आकार ढाई द्वीप प्रमाण गोल 45 लाख योजन व्यास की शिला” यहीं सिद्ध भगवान् विराजते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गलमोक्ष – Pudgalamoksa. A salvation (separation of Karmas from soul). मोक्ष का एक भेद. द्रव्य मोक्ष; सम्पूर्ण कर्मों का आत्मा से अलग हो जाना “