समयसार कलश!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार कलश – Samayasaara Kalasha. Name of a specific composition by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र द्वारा समयसार की आत्मख्याति टीका मे प्रयुक्त किये गये विशेष छंद कलश नाम से कहे गये है। समय ई. 905-955।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार कलश – Samayasaara Kalasha. Name of a specific composition by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र द्वारा समयसार की आत्मख्याति टीका मे प्रयुक्त किये गये विशेष छंद कलश नाम से कहे गये है। समय ई. 905-955।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजविघा – राज्य संचालन की विद्या, यह धर्म अर्थ और काम ये तीनो पुरूशार्थो को सिद्ध करने वाली होती है। Rajavidya-talent of governance of a kingdom
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभध्यान – Shubhadhyaana. Auspicious involvement. शुभद्ध्यान और शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोहित कुड – हैमवत क्षेत्र में स्थित एक कुण्ड जिसमें से रोहित नदी निकलती है। Rohita Kumda-Name of a large pool of haimvati kshetra (region)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्त्यनुशासन – आचार्य समन्तभद्र कृत सस्कृत में 64 ष्लोक ष्लोक प्रमाण स्तोत्र। Yuktyanusasana- name of a book written by acharya samantbhadraji
चतुर्मुख यज्ञ A type of worship (performed by kings). देखें-चतुर्मुखमह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसत्य – Samayasatya. (Jiva, Ajiva, etc). जो वचन आगमगम्य प्रतिनियत 6 द्रव्य व उनकी पर्यायों की यथार्थता को प्रगट करने वाला है वह समयसत्य है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राज्याभिषेक – स्नपन क्रिया, राजा को राज्य का स्चामित्च प्राप्त होने के समय होने वाली एक क्रिया विधि।इसके पष्चात पटट् बा्रधकर वस्त्राभूशण देते हुए राज्य का स्वामित्व प्रदान किया जाता है। Rajyabhiseka-Coronation, the ceremony of crowning a king
चारित्रपाहुड़ A book written by Acharya Kundkund. आचार्य कुन्दकुन्द (ई. १२७-१२९) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम पारीषद् – Madhyam paarishad. A type of council of deities. देवों के परिषद् (सभा) के तीन भेदों में एक भेद ; इसे चंदा नाम से जाना जाता है , इसमें बहुधा अन्तःपुर के महत्तर होतें है जो बेंतरूपीलता को हाथ में ग्रहण करके कंचुकी की पोषाक पहने हुए हैं “