परमात्मराजस्तोत्र!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमात्मराजस्तोत्र :A book written on devotional prayer.एक भक्ति विषयक रचना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमात्मराजस्तोत्र :A book written on devotional prayer.एक भक्ति विषयक रचना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हाहा – Haahaa. A type of peripatetic deity. A large unit of time. गंधर्व नामा व्यंतर जाति का एक भेद। काल का एक प्रमाण, 84 लाख हाहांग त्र 1 हाहा।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हल – Hala. Plough, a divine weapon possessed by Ram. कृषि के लिए उपयोग मे आने वाला एक यंत्र, देवोपुनीत एक अस्त्र-महालोचन देव न उन्हे यह अस्त्र रामचंद्र जी को दिया था।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धर्मास्तिकाय : == धर्मास्तिकायोऽरतो—ऽवर्णगन्धोऽशब्दोऽस्पर्श:। लोकावगाढ: स्पृष्ट:, पृथुलोऽसंख्यातिकप्रदेश:।। —समणसुत्त : ६३१ धर्मास्तिकाय रसरहित है, रूपरहित है, गंधरहित है और शब्दरहित है। समस्त लोकाकाश में व्याप्त है, अखण्ड है और विशाल है तथा असंख्यातप्रदेशी है। उदकम् यथा मत्स्यानां, गमनानुनुग्रहकरं भवति लोके। तथा जीवपुद्गलानां, धर्मद्रव्यं विजानीहि। —समणसुत्त : ६३२ जैसे इस…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिनंदि – Harinamdi. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंध बलात्कारयण भट्टारक आम्नाय की उज्जयिनी गट्ठी के एक भट्टारक महीचन्द्र के गुरु। समय – वि. 948।
ऋषि पुत्र An author of ‘Rishiputra Sanhita’. निमित्त शास्त्र तथा ऋशिपुत्र संहिता के रचियता एक ज्योतिशाचार्य (ई. सन् 6-7 की संधि)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संव्यवहरण दोष – Sanvyavaharana Dosha. A fault related to saint food, careless activities in offering food to saint. श्रावक के निमित्त से होने वाला जैन साधुओं के आहार का एक दोष ” साधु को आहार देने के लिए बर्तन आदि को शीघ्रता से बिना देखे उठाना संव्यवहरण दोष है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिकांत – Hariaaamta. Name of an Indra, the 6th summit of Mahahimvan mountain & a pond situated in Harikshetra (region) where Harikanta river falls. भवनवासी देवो का एक इन्द्र, महाहिमवान पर्वत का छठा कूट, हरि क्षेत्र मे स्थित एक कुण्ड जिसमे से हरिकांता नही गिरती है।