द्वितीयगुण!
द्वितीयगुण Second stage of virtues. भाग जघन्य गुण में अविभाग प्रतिच्छेद की वृद्धि होने पर गुण की द्धितीयादि अवस्था विशेषों को द्वितीय गुण आदि संज्ञा होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वितीयगुण Second stage of virtues. भाग जघन्य गुण में अविभाग प्रतिच्छेद की वृद्धि होने पर गुण की द्धितीयादि अवस्था विशेषों को द्वितीय गुण आदि संज्ञा होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वादशी व्रत Twelve Jaina vows for twelve years. 12 वर्ष तक प्रति वर्ष भाद्रपद शु. 12 को उपवास करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चूली A fire place (used for cooking food). पूतिकर्म का एक भेद , पंचसून आरम्भ में एक ; चूल्हा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थंडिल – Sthamdila. Sterilized place etc.सूक्ष्म जीवो की आशंका से रहित प्रासुक स्थान आदि।
आलोक Light, Whole world, Vision. प्रकाश, लोकपर्यंत, आलोक का दर्शन भी है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्मुख Having four faces (reg. Lord Arihant in Samava- sharan), Name of a city in southern Vijayardh mountain, Name of the 7th Narad (a learned sage). समवशरण में अर्हन्त भगवान् का चारों दिशाओं में मुख दिखाई देना, विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर, सातवें नारद का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मइजिण चरिउ – Sammaijina Chariu. Name of a treatise in Apabhransh language written by poet Raedhu on the conduct of lord mahavira. भगवान महावीर के चरित्र विषयक अपभ्रंष भाषाबद्व कवि रइधू कृत ग्रंथ। समय ई. 1400-1479।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैयावृर्त्ति –Vaiyavrtti Pious service to the saints. साधूसुश्रूषा, सेवा, उपचार, गुरु के अनुकूल परवर्ती करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संचेतना – Sanchetana. Absolute Consciousness. ज्ञानरूप शुद्ध आत्मा या ज्ञान चेतना “