वलीक!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वलीक – Valiik.: One of the omniscients in the assembly of Lord Mahaveera. भगवान् वीर के तीर्थ के 10 अंतकृत केवली में एक “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वलीक – Valiik.: One of the omniscients in the assembly of Lord Mahaveera. भगवान् वीर के तीर्थ के 10 अंतकृत केवली में एक “
चतुर्दश पूर्वधर Acharyas possessing knowledge of 14 Purvas. १४ पूर्व के ज्ञाता ५ मुनि ; विष्णु , नंदिमित्र , अपराजित , गोवर्धन , भद्रबाहु ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमान – Varddhamaana. : Another name of Lord Mahaveera given by Indras, Name of a summit in the north of Ruchakvar mountain. कीर्ति तथा गुणों से वृद्धिंगत होने के कारण इंद्र द्वारा प्रदत्त भगवान महावीर का अपरनाम ,रुचकपर्वत की उत्तर दिशा का एक कूट “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भागाहार संक्रमण – Bhagahara Samkramana. Transitional change in omen Karmas of beings. जिनके द्वारा संसारी जीवों के शुभ – अशुभ कर्म परिणामों के निमित्त पाकर बदल जाये – अन्य प्रक्रति रूप हो जावे, इसके ५ भेद हैं “
चतुर्थकाल The fourth division of Avasarpini Kal (regressive half cycle of time). अवसर्पिणी काल के ६ भेदों में दुषमा-सुषमा नामक चौथा भेद , जिसमें २४ तीर्थंकर जन्म लेते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बिल – Bila. Dwelling place of hellish beings. नारकियों के जन्म व रहने का स्थान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यत्व – Bhavyatva. Worthiness for salvation. जीव का वह स्वभाव जिससे सम्यक्त्व प्रकट होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रसम्यग्दर्शन – Suutra Samyagdarshana. See- Sutra Ruchi. देखे – सूत्र रूचि ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्यासागर – Vidyashagara. Name of a great Digambar Jain Acharya of 20th century. चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिवसागर महाराज के शिष्य मुनि श्री ज्ञानसागर महाराज (जो बाद में समाज द्वारा आचार्य बनाये गये) द्वारा दीक्षित बीसवीं सदी के एक प्रभावक आचार्य “