विभंगा!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभंगा – Vibhamga. A particular classification of 12 rivers in the east & west videh Kshetras (regions). पूर्व व अपर विदेहों में स्थित १२ नदियां “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभंगा – Vibhamga. A particular classification of 12 rivers in the east & west videh Kshetras (regions). पूर्व व अपर विदेहों में स्थित १२ नदियां “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञापनी – Pragyaapani. Most convient informatory language (easy preaching). एक भाषा; धर्मोपदेश करना ” यह भाषा अनेक लोगों को उद्देश्य कर कही जाती है “
द्वितीयगुण Second stage of virtues. भाग जघन्य गुण में अविभाग प्रतिच्छेद की वृद्धि होने पर गुण की द्धितीयादि अवस्था विशेषों को द्वितीय गुण आदि संज्ञा होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वादशी व्रत Twelve Jaina vows for twelve years. 12 वर्ष तक प्रति वर्ष भाद्रपद शु. 12 को उपवास करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आलोक Light, Whole world, Vision. प्रकाश, लोकपर्यंत, आलोक का दर्शन भी है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदसंघात:Association-cum-dissociation related to karmic molecules. भेद अर्थात्स्कन्धों का टूटना एवं संघात होनाअर्थात्भित्र-भित्र परमाणुओं या स्कन्धों से मिलकर स्कंधों की उत्पत्ति होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैयावृर्त्ति –Vaiyavrtti Pious service to the saints. साधूसुश्रूषा, सेवा, उपचार, गुरु के अनुकूल परवर्ती करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेद :Difference, type, division, separation, discrimination, disjunction. विरुध धर्मों एवं भित्र-भित्र कारणों काहोना यही भेद है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् चारित्र : == सम्यक्त्वरत्नभ्रष्टा, जानन्तो बहुविधानि शास्त्राणि। आराधनाविरहिता, भ्रमन्ति तत्रैव तत्रैव।। —समणसुत्त : २४९ किन्तु सम्यक्त्व रूपी रत्न से शून्य अनेक प्रकार के शास्त्रों के ज्ञाता व्यक्ति भी आराधनाविहीन होने से संसार में अर्थात् नरकादि गतियों में भ्रमण करते रहते हैं। श्रुतज्ञानेऽपि जीवो, वर्तमान: स न प्राप्नोति…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिक्षु प्रतिमा – Bhikshu Pratima. Particular 12 stages of renunciation for holy death of Jaina saints. सल्लेखना की साधना हेतु जैन साधुओं के लिए आहार त्याग आदि से संबंधित १२ प्रतिमाएं होती हैं, इनका विशेष वर्णन भगवती आराधना में देखें “