तिर्रूक् सूर्यतप!
तिर्रूक् सूर्यतप A type of austerity (pertaining to the walking in the day time). कायक्लेश सूर्य को तिर्यक् (दायंे-बायें ) करके गमन करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तिर्रूक् सूर्यतप A type of austerity (pertaining to the walking in the day time). कायक्लेश सूर्य को तिर्यक् (दायंे-बायें ) करके गमन करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यावली- आवली के ऊपर की जो दूसरी आवली है वह प्रत्यावली है। pratyavali – a time unit (reg. avali.)
तिरोभाव Concealment, Disappearance (by divine power). दैविक शक्ति अदृष्य हो जाना, शून्य हो जाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहवृत्ति – Sahavritti. Tendency of co-asociation or co-association or co-inclination. समवृत्ति अर्थात् गुण और गुणी का साथ-साथ रहना अर्थात् उनका कथंचित् एकत्व -तादात्म्य सम्बंध ।
तार The 3rd Patal (layer) of the 4th hell. चतुर्थ नरक का तृतीय पटल। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तर्क विरूद्ध Opposition against absolute facts of scriptures (related to Jain philosophy). आगम प्रामाणिकताओं में विरोध मानना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रात्यकारी इन्द्रियाँ- जो इन्द्रियां पदार्थ को स्पृश्ट और बद्ध होकर जानती है वह प्राप्यकारी कहलाती है। जैसे-स्पर्षन, रसना, ध्राण एवं श्रोत्र इन्द्रियाँ। मात्र चक्षु इन्द्रिय आप्राप्यकारी होती है। PrapyakariIndriyan- Senses causing cognizance with actual experience concerning the particular subject
ऊमर One of the figs – a fruit, not edible according to Jain philosophy . उदम्बर फलों में एक फल का नाम इनमें त्रस जीवों की योनिस्थान होने से अभक्ष्य हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणापान पर्याप्ति- छह पर्याप्तियों में एक पर्याप्ति इसे श्वासोच्छ्वास भी कहते है। PranapanaParyapti- Breathing vitality