आचार्य श्री उमास्वामी परिचय तत्त्वार्थसूत्र ग्रन्थ के रचयिता आचार्य श्री उमास्वामी हैं । इनको उमास्वाति भी कहते हैं । इनका अपरनाम गृद्धपिच्छाचार्य है । धवलाकार ने इनका नामोल्लेख करते हुए कहा है कि- तह गिद्धपिंछाइरियप्पयासिदतच्चत्थसुत्तेवि । उसी प्रकार से गृद्धपिच्छाचार्य के द्वारा प्रकाशित तत्त्वार्थसूत्र में भी कहा है । इनके इस नाम का समर्थन श्री…
परमपूज्य आर्यिका श्री आदिमती माताजी का परिचय लेखिका-आर्यिका सुबोधमती’ (शिष्या-आर्यिका श्री आदिमती माताजी)’ यह भारत वसुन्धरा प्रारंभ से ही अनेकानेक ऋषि मुनियों की विहार स्थली रही है। जिस प्रकार समय-समय पर इस भूमि पर तीर्थंकरों तथा अन्य महापुरुषों ने जन्म लेकर तथा धर्म का प्रचार-प्रसार कर इस भारतभूमि को अलंकृत किया है, उसी प्रकार महिलाओं…
ब्राह्मी-सुन्दरी ने दीक्षा क्यों ग्रहण की थी ? महापुराण के अन्तर्गत आदिपुराण ग्रन्थ के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने अपनी पुत्री ब्राह्मी-सुन्दरी को युग की आदि में सर्वप्रथम विद्या ग्रहण कराया था अत: वे अपने पिता त्रैलोक्यगुरु के अनुग्रह से सरस्वती की साक्षात् प्रतिमा के समान बन गई थीं। पुन: भरत आदि पुत्रों को भी भगवान…