आचार्य श्री जिनसेन जी – ‘पार्श्वाभ्युदय’ काव्य
आचार्य जिनसेन (द्वितीय) और उनका ‘पार्श्वाभ्युदय’ काव्य -विद्यावाचस्पति डॉ. श्रीरंजनसूरि देव, पटना जैन काव्यों की महनीय परम्परा में, आचार्य जिनसेन (द्वितीय) द्वारा प्रणीत ‘पार्श्वाभ्युदय’ काव्य की उपादेयता सर्वविदित है। आचार्य जिनसेन (द्वितीय), आचार्य नेमिचंद्र शास्त्री की ऐतिहासिक कृति ‘तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा’ (खंड २) के अनुसार श्रुतधर और प्रबुद्धाचार्यों के बीच की...