शीलशिरोमणि आर्यिका सीता सीता का जन्म— मिथिलापुरी में राजा जनक राज्य करते थे। उनकी रानी विदेहा पातिव्रत्य आदि गुणों से परिपूर्ण परमसुन्दरी थी। एक समय वह गर्भवती हुई। पुन: नव महीने बाद उसने पुत्र और पुत्री ऐसे युगल संतान को जन्म दिया। पुत्र के जन्म लेते ही उसके पूर्वभव के वैरी महाकाल नामक असुरकुमार देव…
गणिनी आर्यिका ब्राह्मी-सुन्दरी आदि ब्रह्मा तीर्थंकर ऋषभदेव के दो रानियाँ थीं-यशस्वती और सुनन्दा। बड़ी रानी यशस्वती ने भरत, वृषभसेन आदि सौ पुत्रों को जन्म दिया, पश्चात् एक कन्या को जन्म दिया जिसका नाम ब्राह्मी रक्खा गया। सुनन्दा के कामदेव बाहुबली पुत्र हुए और एक कन्या हुई जिसका नाम सुन्दरी रक्खा गया। ये दोनों कन्यायें अपनी…
आचार्य श्री शान्तिसागर महाराज के उपदेश के कतिपय अंश आचार्य शान्तिसागर जी ने ३६ दिन की सल्लेखना ग्रहण की थी। सल्लेखना के २६वें उपवास के दिन उन्होंने यह सन्देश दिया था, कि अपने जीवन में संयम धारण करो इसे मत। समाधि के समय उनकी उम्र ८४ वर्ष की थी। उनकी समाधि कुन्थल गिरी पर ६…