परमपूज्य आर्यिका श्री आदिमती माताजी का परिचय लेखिका-आर्यिका सुबोधमती’ (शिष्या-आर्यिका श्री आदिमती माताजी)’ यह भारत वसुन्धरा प्रारंभ से ही अनेकानेक ऋषि मुनियों की विहार स्थली रही है। जिस प्रकार समय-समय पर इस भूमि पर तीर्थंकरों तथा अन्य महापुरुषों ने जन्म लेकर तथा धर्म का प्रचार-प्रसार कर इस भारतभूमि को अलंकृत किया है, उसी प्रकार महिलाओं…
ब्राह्मी-सुन्दरी ने दीक्षा क्यों ग्रहण की थी ? महापुराण के अन्तर्गत आदिपुराण ग्रन्थ के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने अपनी पुत्री ब्राह्मी-सुन्दरी को युग की आदि में सर्वप्रथम विद्या ग्रहण कराया था अत: वे अपने पिता त्रैलोक्यगुरु के अनुग्रह से सरस्वती की साक्षात् प्रतिमा के समान बन गई थीं। पुन: भरत आदि पुत्रों को भी भगवान…
शीलशिरोमणि आर्यिका सीता सीता का जन्म— मिथिलापुरी में राजा जनक राज्य करते थे। उनकी रानी विदेहा पातिव्रत्य आदि गुणों से परिपूर्ण परमसुन्दरी थी। एक समय वह गर्भवती हुई। पुन: नव महीने बाद उसने पुत्र और पुत्री ऐसे युगल संतान को जन्म दिया। पुत्र के जन्म लेते ही उसके पूर्वभव के वैरी महाकाल नामक असुरकुमार देव…