35. भागीरथ महामुनि के पाद प्रक्षाल के क्षीरोदधि के जल से गंगानदी भागीरथी कहलाई है!
भागीरथ महामुनि के पाद प्रक्षाल के क्षीरोदधि के जल से गंगानदी भागीरथी कहलाई है और तीर्थपने को प्राप्त हो गई है। भागीरथोऽपि तान् गत्वा कृत्वा भक्त्या नमस्क्रियाम्। धर्ममाकण्र्य जैनेन्द्रमादत्त श्रावकव्रतम्।।१३३।। प्रकटीकृततन्मायो मणिकेतुश्च तान् मुनीन्। क्षन्तव्यमित्युवाचैतान सगरादीन् सुहृद्वरः।।१३४।। कोऽपराधस्तवेदं नस्त्वया प्रियमनुष्ठितम्। हितं चेति प्रसन्नोक्त्या ते तदा तमसान्त्वयन्।।१३५।। सोऽपि सन्तुष्य सिद्धार्थो देवो दिवमुपागमत्। परार्थसाधनं प्रायो ज्यायसां परितुष्टये।।१३६।।…