प्रतिकुंचन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिकुंचन – Pratikunchana. A type of deceit or illusion, concealment of own faults. माया का एक भेद, आलोचना करते समय अपने दोष छिपाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिकुंचन – Pratikunchana. A type of deceit or illusion, concealment of own faults. माया का एक भेद, आलोचना करते समय अपने दोष छिपाना “
गजवती A river of varun mountain in Bharat kshetra (region). भारत क्षेत्र के वरुण पर्वत पर स्थित एक नदी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पमाला – Puspamala. Name of a ruling female deity of a summit (Sagar) in Nandan forest, Wreath; garland. नन्दन वन में स्थित सागर कूट की स्वामिनी दिक्कुमारी देवी, फूलों का हार “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्कलावती – Puskalavati. Main city of Pushkalavarta area of the east Videh (region). पूर्व विदेह के पुष्कलावर्त क्षेत्र की मुख्य नगरी. अपरनाम पुण्डरीकिणी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषवेदकर्मप्रकृति – Purusavedakarmaprakrti. Name of the Karmic nature of male causing lust for female. जिस वेदकर्म के उदय से स्त्री में रमण करने की चाह हो “
गंधमाली A deity of Gandhmali summit (Koot) of Gandhmadan gajdant mountain. गंधमादन गजदन्त के गंधमाली कूट का स्वामी देव । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रणिधि – Pranidhi. A type of deceit or illusion. माया का एक भेद ” व्यापार आदि में हीनाधिक कीमत की सदृशवस्तुओं को मिलाना ( जैसे-सोने में ताँबा आदि), वस्तुओं को तोलने में हेराफेरी करना आदि रूप मायाचार है “
उपशांतकर्म Karmas existing but not fruitful. कर्म की शक्ति की अप्रगटता या फल न देना किन्तु सत्ता में बैठे रहना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचय – Prachaya. Accumulation, collection, Togetherness. समूह, संग्रह, संचय, साधारण मेलजोल “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्योपजीवन – Vidyapajivana. A fault of food and hermitage related to saint (to attract donor with mystical knowledge). आहार एवं वसतिका का एक दोष; दातार को मंत्र तंत्रादि बताकर आहार एवं वसतिका प्राप्त करना साधु का विद्योपजीवी नामक दोष है “