लघु चैत्यभक्ति
लघु चैत्यभक्ति - १ नव सौ पचीस कोटि त्रेपन, लाख सताइस सहस प्रमाण। नव सौ अड़तालिस जिन प्रतिमा, त्रिभुवन में हैं करूं प्रणाम।। ज्योतिष व्यंतर के गृह में, शाश्वत जिनप्रतिमा संख्यातीत। पंच शतक धनु तुंग पूर्वमुख, पर्यंकासन वंदूँ नित्य।।१।। अंचलिका भगवन् ! चैत्यभक्ति अरु कायोत्सर्ग किया उसमें जो दोष। उनकी आलोचन करने को, इच्छुक हूँ...