नवदीक्षित आर्यिका श्री भक्तिमती माताजी का परिचय गृहस्थ नाम – सौ. गीता जैन ध.प श्री भागचंद जैन, केकड़ी (राज.) जन्मतिथि – ३१-१०-१९६२ जन्मस्थान – जूनिया माता – श्रीमती चाँद देवी जैन पिता – श्री रतनलाल जैन भाई-बहन – एक भाई (विवाहित) जाति – अग्रवाल दिगम्बर जैन गोत्र – मंगल लौकिक शिक्षा – पाँचवीं कक्षा धार्मिक…
BARAH BHAVNA-अंग्रेजी बारह भावना presented by – Aryika Chandnamati (Tune – Chalat Musafir Moh liye Re……) I’m praying to you Jinvar deva! I’m praying to you Praying to you, I’m saying to you-2 I’m praying to you Jinvar deva. I’m…. I did not know about my soul, I could not think about myself. So…
कंचन-सोना नामकी धातु को कंचन कहते हैं ।पूजन में ऐसी सोने की झारी से जल की धारा करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है ।
पंच परमेष्ठी नमस्कार अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु ये पाँच परमेष्ठी हैं इनको नमस्कार करने से पापों का नाश होता है। अरिहंत– जिन्होंने चार घाति या कर्मों का नाश कर दिया है, जिनमे छियालीस गुण होते हैं और अठारह दोष नहीं होते हैं, वे अरिहंत परमेष्ठियों कहलाते हैं। सिद्ध– जिन्होंने आठों कर्मों का नाश…
पंचेन्द्रिय तिर्यंच के भेद पंचेन्द्रिय तिर्यंच के तीन भेद हैं- जलचर, स्थलचर और नभचर। जलचर– जो जल में रहते हैं। जैसे-मगर, मछली, कछुआ आदि। स्थलचर- जो पृथ्वी पर चलते हैं। जैसे-बैल, घोड़ा, बन्दर, हाथी आदि। नभचर- जो आकाश में उड़ा करते हैं। जैसे-कबूतर, तोता, चिड़िया आदि। सैनी-असैनी पंचेन्द्रिय के दो भेद हैं- सैनी, असैनी। जिनके…
संसार रोग की दवा भलाई की पत्ति ४ तोला, प्रेम के बीज ३ तोला, सच्चाई की जड़ २ तोला, परोपकार के फल ५ तोला, तपस्या की छाल १५ तोला। विधि— इन पाँचो वस्तुओं को दस्ते में कूट कर आत्मज्ञान के डिब्बे में भर लो और सत्संग के चमचे से दो—तीन बार प्रतिदिन खाओ। परहेज:—चिंता की…