स्थापना स्तव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थापना स्तव – Sthaapanaa Stava. Hymning the idols of lord Arihant.जिनेन्द्र भगवान के गुणो को धारण करने वाली जिन प्रतिमओ के स्वरुप का कीर्तिन करना स्थापना स्तव है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थापना स्तव – Sthaapanaa Stava. Hymning the idols of lord Arihant.जिनेन्द्र भगवान के गुणो को धारण करने वाली जिन प्रतिमओ के स्वरुप का कीर्तिन करना स्थापना स्तव है।
गुरुमूढ़ता Belief in false preceptor of spiritual teachers. हिन्सादि पाप क्रियाओं में एवं आरम्भ परिग्रह में लिप्त रहने वाले साधुओं को गुरु मानकर उनकी भक्ति , वंदना , प्रशंसा आदि करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संजय – Sanjaya. Name of a super saintwho called Lord varddhaman by a new name ‘Sanmati’. एक चारण रिद्धिधारी मुनि; इनके साथ विहार करने वाले द्वितीय चारणऋद्धिधारीमुनि का नाम विजय था ” एक बार कुण्डलपुर के नंदावर्त महल में पालने में झूलते तीर्थंकर बालक वर्द्धमान के दर्शन मात्र से इन मुनियों का संदेह दूर…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यग्दर्षन वाक – Samyagdarshana Vaak. Right spiritual speech. वचन के 12 भेदो मे एक भेदः सम्यक् मार्गप्रवर्तक उपदेष सम्यग्दर्शनवाक् है।
चैतन्यानुविधायी Result related with only consciousness. उपयोग; चैतन्य अन्वयी अर्थात् चैतन्य को छोड़कर अन्यत्र नहीं रहता वह परिणाम । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थपति – Sthapati. Architect, one of the 14 jewels of chakrawarti (emperor).भवन निर्माण कला मे निपुण वास्तुकार, चक्रवर्ताीे के 14 रत्नो मे एक रत्न। जो वास्तुविद्या का पारगामी होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विश्वसेन – Vishvasena. Father’s Name of Lord parshvanath & Lord Shantinath. भगवान पाशर्वनाथ एवं शांतिनाथ के पिता का नाम ” पाशर्वनाथ भगवान के पिता का नाम अश्वसेन भी है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुद्रविजय – Samudravijaya. Father’s name of the 22nd Tirthankar (Jaina Lord) Neminath. 22 वें तीर्थकर नेमिनाथ के पिता। शैरीपुर के राजा अन्धकवृष्णि और सुभद्रा के 10 पुत्रों मे प्रथम पुत्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्कर्म – Satkarma. Good deeds, a composition composed by Acharya Virsen on Shatkhandagam treatise. अच्छे कर्म, आचार्य वीरसेन (ई. 770-827) द्वारा रचित प्राकृत षट्खण्डागम का अतिरिक्त अधिकार “
छत्रत्रय Triple parasol, an auspicious emblem of Lord Arihant. भगवान के आठ प्रातिहार्यों में से एक . ये तीनों लोकों के स्वामित्व को सूचित करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]