बालक्षुत!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालक्षुत – Balasruta. Reading of wrong scriptures. आत्म स्वभाव से विपरीत बहुत प्रकार के शास्त्रों का पढ़ाना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालक्षुत – Balasruta. Reading of wrong scriptures. आत्म स्वभाव से विपरीत बहुत प्रकार के शास्त्रों का पढ़ाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यप्रभ -Punyaprabha. Protecting deity of Kshaudravaradvip (island). क्षौद्रवर द्वीप का रक्षक देव “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == साधक : == बाह्यमूघ्र्वमादाय, नावमाकांक्षेत् कदाचित् अपि। पूर्वकर्मक्षयार्थाय, इमं देहं समुद्धरेत्।। —समणसुत्त : ५६८ ऊध्र्व अर्थात् मुक्ति का लक्ष्य रखने वाला साधक कभी भी बाह्य विषयों की आकांक्षा न रखे। पूर्वकर्मों का क्षय करने के लिए ही इस शरीर को धारण करे। चरेत्पदानि परिशंकमान:, यत्कििंचत्पाशमिह मन्यमान:। लाभान्तरे जीवितं…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वादी – Vaadii.: Expert in spiritual argument,Preceptor possessing knowledge of main principle of Jainism,The plaintiff, a complainant. शास्त्रार्थ में विजय प्राप्त करने में कुशल ,मुनियों का एक भेद-सिद्धांतो के प्रतिष्ठापक मुनि,तीर्थंकरों की समवशरण सभा में ऐसे मुनियों का समूह रहता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंडित – Pandita. A religious learned person, one having right spiritual faith. ञानी, जो पुरुष परमात्मा को शरीर से जुदा एवं केवलज्ञान से पूर्ण जानता है वही परम समाधि में तिष्ठता हुआ पंडित अर्थात् अन्तरात्मा है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यकुमुदचन्द्रिका – Bhavyakumudachandrika. Name of a treatise written by Pandit Ashadhar. पं. आशाधर (ई. ११७३- १२४३) कृत एक ग्रंथ “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिमार्ग–Munimaarg. The prescribed auspicious path for saints. इसके दो भेद है; उत्सर्ग–शुद्धोपयोग रूपपरमवीतरागसयम हो, अपवाद जहा शुद्धोपयोग के बाहरी साधनों का व्यवहार हो या शुभोपयोग रूप सराग सयम हो”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्ममालिनी: Name of a chief female divinity of peripatetic Indras. व्यंतर इन्द्र की प्रधान देवी का नाम ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यशपाल–Yashpaal. Name of an Acharya. मूलसंघ के एक आचार्य, अपरनाम जयपाल”