आयत चक्षु!
आयत चक्षु Wide – fully opened eyes. पूरी तरह से खुली आंखें।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राधान्य पद- उपक्रम का एक भेद; बहुत से पदार्थो के होने पर भी किसी एक पदार्थ की बहुलता आदि द्वारा प्राप्त हुई प्रधानता से बोले जाने वाला नाम। जैसे- आग्रवन, निम्नवन इत्यदि। Pradhanyapada-A type of Upakrama( a type of persuasion) dominant name or thing
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणातिपात विरमणव्रत- अहिंसाव्रत; जीवों कें प्राणों की रक्षा करना। PranatipataViramanavrata- A vow of non violence
दासत्व Servitude; being in the service of God. सेवकपने की भावना सम्यग्दृष्टि का वात्सल्य गुण सिद्ध प्रतिमा, जिनबिम्ब, जिनमन्दिर, चार प्रकार के संघ में और शास्त्रों में वात्सल्य भाव भी दासत्व कहलाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राकृत संख्या- गणित की सभी पूर्ण धनात्मक संख्याएं (1, 2, 3,……………….)। Prakrtasankya- Natural number
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्षवर(सागर द्वीप)– Yakshvar (Saagar Dvip). Name of a island and ocean of middle universe. मध्यलोक के अंतिम सौलह द्वीपों में तेरेहवा द्वीप व समुंद्र”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलात्कार गण- जैनाचार्यों की शाखा; कुंदकुंद आचार्य के समय से प्रचलित। जैसा कि प्रशस्ति आदि में लिखित रहता है- कुन्दकुन्दाम्नाये सरस्वती गच्छे बलात्कार गणे………। Balatkara Gana- A branch of jain acharyas
गति बन्धाभाव Lack of binding of any Karmic nature related to any Gati for the next birth (i.e. lack of transmi-gration), Motion without constraint. आगे के भव के लिए चारों गतियों के बन्ध का अभाव होना ,गति का एक भेद ; एरण्ड बीज आदि की गति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तेंदु Name of an Indian tree, called initiation – tree of Lord Shreyansnath. श्रेयांसनाथ भगवान के दीखा वृक्ष का नाम (पदमपुराण के अनुसार) महापुराण के अनुसार यह तुम्बुरू वृक्ष है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]