शून्य वर्गंणा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शून्य वर्गंणा – Shunya Varganaa. A type of Karmic aggregates. वर्गणाओं का एक प्रकार “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शून्य वर्गंणा – Shunya Varganaa. A type of Karmic aggregates. वर्गणाओं का एक प्रकार “
थानक पंथी / थानकवासी A shvetambar Jain sect. श्वेताम्बर जैन पंथ, ये प्रतिमा को नहीं पूजते हैं, साधु वस्त्र एंव मुह पर पट्टी रखते हैं । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शूद्र वंश – Shudra Vansha. The lineage of Shudras(see-Shudra). भगवान ऋषभदेव द्वारा स्थापित क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र इन तीन वर्णों में एक वर्ण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानत्रिक – Styanatrika. A triplet of karmic nature related to sleepiness.स्त्यानगृद्वि, निद्रानिद्रा, प्रचलाप्रचला ये तीन कर्म प्रकृतियाॅ स्त्यानत्रिक कहलाती है।
त्रैकाल्ययोगी The disciple of Golacharyaji. एक आचार्य (ई.920-930) जो गोलाचार्य (ई. 900-920) के शिष्य तथा अभयनंदि (ई.930-950) के गुरू थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चाक्षुष Visible, which can be seen by eyes. आँखों से देखने योग्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधितंत्र – Samaadhitantra. Name of a treatise written by Acharya Pujyapad. आचार्य पूज्यपाद (ई.श. 5) कृत अध्यात विषयक 105 संस्कृत श्लोकों मे निबद्व ग्रंथ। अपरनाम समाधिषतक है।
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चितिशक्ति Power of consciousness. अजड़त्व अर्थात चेतनत्व स्वरुप चितिशक्ति है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दश गुणस्थान Fourteen Gunsthan-stages of spiritual developments. १४ गुणस्थान ; मिथ्यात्व , सासादन , मिश्र , अविरत सम्यग्दृष्टि , देशाविरत , प्रमत्त , अप्रमत्त, अपूर्वकरण , अनुवृत्तिकरण, सूक्ष्म-साम्पराय , उपशांत मोह , क्षीणमोह , संयोगकेवली, आयोगकेवली ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]