मुख्यगणधर!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य गणधर– Mukhya Gandhar. Head of the chief of disciples of Lord. तीर्थंकर के प्रधान शिष्य, जो दिव्यध्वनी का सार दवादवाशांगश्रुत के रूप में जगत को प्रदान कटे है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य गणधर– Mukhya Gandhar. Head of the chief of disciples of Lord. तीर्थंकर के प्रधान शिष्य, जो दिव्यध्वनी का सार दवादवाशांगश्रुत के रूप में जगत को प्रदान कटे है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव गति – Vibhava Gati. Contrary movement. जीव – पुद्ग्ल की स्वभाव से विपरीत गति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवित्त चक्र- योग आदि क्रियाओं में रात-दिन लगे रहना। Pravita cakra- to be always engaged in yogic activities
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति बंध – Prakrti Bandha. Regular binding of different types of karmic natures. राग, द्वेषादि के निमित्त से जीव के साथ ज्ञानावरणादि कर्मों का निरंतर बंध होना अर्थात् जीव के भावों की विचित्रता के अनुसार विभन्न प्रकार की फलदान शक्ति वाले कर्मों का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यय स्थान- pratyaya sthana Situations causing for the karmic influx or inflow आस्त्रव सबंधी प्रत्ययों के उदय आदि स्थान।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा गुरू :Acharyas of Moolsangh in the tradition of Gautam Swami. गौतम स्वामी की परम्परा में मूलसंघ के आचार्यगण ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य कक्ष – Bahya Kaksa. Exterior cells. आंगन , बरामदा आदि “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मौदगलायन–Modgalayan. Name of a great Jain Acharya in the stream of Lord Parshvanath, A type f inactivist. भगवान् पार्श्वनाथ की शिष्य परम्परा में हुए एक बड़े जैनाचार्य, अक्रियावादी के 84 भेदो में एक भेद”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतीघातरहित- pratighatarahita Without impediment or hinderance. प्रतिबन्ध या बाधा रहित।