विहायोद्विक!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहायोद्विक –Vihayodvika. A type of dyad pertaining to the praised & non-praised spatial movement. प्रशस्त और अप्रशस्त विहायोगति “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहायोद्विक –Vihayodvika. A type of dyad pertaining to the praised & non-praised spatial movement. प्रशस्त और अप्रशस्त विहायोगति “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिचन्द्र – Haricandra. Name of the 4th predestined Balbhadra. आगामी चैथे बलभद्र।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पति :Husband, the male life partner. यज्ञ, पूजा, प्रतिष्ठा आदि शुभ कार्यो के साथ स्त्री का विववाह जिसके साथ हुआ हो ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेषनय – Vishesha Naya. A particular standpoint believing that the soul is non-extricated. अव्यापकता रूप कथन करने वाला नय ” जैसे – आत्मद्रव्य एक मोती की भांति अव्यांपक है, सदा से रहने वाले नर – नारकादि जीव का बोधन करना विशेष नय हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हनुमंत चारित्र – Hanumammta Caarita. Name of a book written by Pandit Raimalla. पं रायमल्ल (ई. 1575-1593) कृत भाषा ग्रंथ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पर प्रत्यय उत्पाद:See- Para Nimittaka Utpada.देखे निमित्तक उत्पाद ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्षणभंगुरता : == जन्म मरणेन समं, सम्पद्यते यौवनं जरासहितम्। लक्ष्मी: विनाशसहिता, इति सर्व भंगुरं जानीत।। —समणसुत्त : ५०७ जन्म मरण के साथ जुड़ा है और यौवन वृद्धावस्था के साथ। लक्ष्मी चंचला है। इस प्रकार (संसार में) सब कुछ क्षणभंगुर है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वेदयबंधी प्रकृति – Svodayabamdhii Prakrti. Karmic natures causing binding with self rising. स्वयं के उदय के साथ बंधने वाली प्रकृतियाॅ। ज्ञानावरणी की 5, अंतराय की 5, दर्शनावरणी की चक्षुदर्शनावरणादि 4, तैजस शरीर, कार्मण शरीर, निर्माण, स्थिरयुगल, शुभयुगल तथा वर्णचतुष्क, अगुरुलधु और मिथ्यात्व इन 27 प्रकृतियो का स्वोदय से बंध होता है।