इभ!
इभ Elephant, one of the 14 jewels of Chakravarti. हाथी चक्रवर्ती के 14 रत्नों में एक सजीव रत्न।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इभ Elephant, one of the 14 jewels of Chakravarti. हाथी चक्रवर्ती के 14 रत्नों में एक सजीव रत्न।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवसुंदर Name of a commentator of ‘Bhaktamar Stotra Tika’. भक्तामर स्त्रोत टीका के कर्ता ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पनसा:A river of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरत क्षेत्र स्थित आर्यखण्ड की एक नदी ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सद्भाव : == किं तेणावि घडिज्जइ जो न हु सब्भावरसनिसित्तो वि। पुरिसो य पुहइिंपगे व मिज्जिओ अप्पमप्पेइ। —गाहारयणकोष : ६५ जो सद्भाव के रस से अभिसिंचित नहीं है, उसके जन्म से क्या लाभ ? पुरुष तो पृथ्वी के िंपड जैसा होता है जो पानी से भीजकर अपने आपको…
आप्तमीमांसा A treatise written by ‘Acharya Samantabhadra’. तत्वार्थ सूत्र के मंगलाचरण पर आचार्य समन्तभद्र (ई.श.2) द्वारा रचित एक न्यायपूर्ण ग्रंथ (तर्क की कसौटी पर सर्वज्ञ देव को सच्चे देव सिद्ध करने का न्याय संबंधी उत्तम ग्रन्थ)। इसका दूसरा नाम देवागम स्तोत्र भी है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंगविधि – Bhamgavidhi. A particular method for obtaining knowledge of something, synonym word for shrutgvan (scrip- tural knowledge). अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शील आदि भंग का जिसके द्वारा विधान किया जाता है उसे भंगविधि अर्थात् श्रुतज्ञान कहते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शौच : == समसंतोसजलेणं जो धोवदि तिव्व—लोहमल—पुंजं। भोयण—गिद्धि—विहीणो, तस्स सउच्चं हवे विमलं।। —समणसुत्त : १०० समता और संतोष के जल से जो तीव्र लोभ के मल—पुंज को धाया करता है, भोजन की लालसा से जो विहीन हुआ करता है, वह पवित्र शौच धर्म से संपन्न होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भदंत – Bhadamta. Respectful word for addressing great ascetics. जो सब कल्याणों को प्राप्त हों वह भदन्त हैं , साधु का अपरनाम “
इत्वरिका अपरिगृहीतागमन An infraction of vow of celibacy. ब्रह्मचर्य अणुव्रत का एक अतिचार बिना विवाही व्यभिचारिणी स्त्री से हास्यादि संबंध रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]