मूर्तिक पदार्थ!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्तिक पदार्थ–Muurtik Padarth. Tangible matters, which can be touched, tested & felt etc. रूपी पदार्थ जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण गुण पाए जाते है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्तिक पदार्थ–Muurtik Padarth. Tangible matters, which can be touched, tested & felt etc. रूपी पदार्थ जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण गुण पाए जाते है”
दण्डकारणिक An administrator who can punish, A magistrate. दण्ड देने वाला अधिकारी । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुद्धि ऋद्धि – Buddhi Riddhi Supernatural power of intellect. एक प्रकार की ऋद्धि जिसके १८ भेद हैं “
देवदत्ता A reverential palanquin (pertaining to Lord Vimalnath). एक पालकी तीर्थंकर विमलनाथ इसी पर आरूढ़ होकर दीक्षा लेने हेतु सहेतुक वन गये थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वहण – Nirvahana. Acquiring right fait and other virtues with calmness (free from anxiety). सम्यग्दर्शन आदि गुणों को निराकुलतासे धारण करना परीषहादिक आने पर व्याकुल चित्त न होकर सम्यग्दर्शन आदि रत्नत्रय में तत्पर रहना “
चक्षुदर्शन Visionary conation, ocular perception. चक्षु इन्द्रिय के द्वारा पदार्थ का ज्ञान होने से पूर्व जियो सामान्य प्रतिभास होता है वह चक्षुदर्शन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आसीधिका Omen permission (taken while coming out from a temple etc.). जिन मन्दिर अथवा यति का निवास अथवा मठ से लौटते समय उच्चारण करने का शब्द जिसका अर्थ वहाँ रहने वाले भूत , यक्षादि से पूछकर बाहर आना है इसके लिये असही शब्द का भी प्रयोग होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य शुक्लध्यान – Bahya Sukladhyana. Meditational activity of controlling movements of body organs. आत्मा की वीतरागी अवस्था की बाहरी पहचान; शरीर और नेत्रों को स्पन्द रहित रखना, जंभाई, उदूगार आदि नहीं होना , प्राणापान का प्रचार व्यक्त न होना आदि बाह्य शुक्लध्यान हैं “