फालि!
फालि Accumulated matters in some particular time. एक समय में उठाये गये समस्त द्रव्य को एक फालि कहते हैं [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
फालि Accumulated matters in some particular time. एक समय में उठाये गये समस्त द्रव्य को एक फालि कहते हैं [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चतुर्मुख देव A writer who wrote ‘Padupachasi’ & ‘Harivanshpuran’. फ्दुपचासी एवं हरिवंश के कर्ता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुद्र – Samudra. Ocean, sea (one of the dreams of Lord’s & Bharat chakralvatis mother). सागर। तीर्थकरो की माता एवं भरत चक्रवर्ती की माता (यषस्वती) के स्वप्नों मे एक स्वप्न।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राध – परद्रव्य के परिहार से षुद्ध आत्मा की सिद्धि अथवा साधन राध कहलाता है।आराधना प्रसन्नता पूर्णता सिद्धि साधित आराधिन सेसिद्धि आदि राध के ही पर्यावाची नाम है। Radha-Pertaining to attainment of spiritual power
चतुर्दशी व्रत A type of devotional prayer. १४ वर्ष तक परतमॉस की दोनों चतुर्दशियों को १६ प्रहार का उपवास करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दिग्पाल A type of guardian deities. दिक्कुमार जाति के देव लोकपाल इन्हीं देवों में से होते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहार –Vihara. Movement of Jaina saints on foot from one place to another. गमन, एक स्थान पर रहने से राग बढ़ता है इसलिए जैन साधु विहार करते हैं ” वर्षायोग के अतिरिक्त अधिक काल एक स्थान पर नहीं ठहरते “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीरसागर (आचार्य) –Virasagara (Acarya) Name of the first disciple of CharitraChakravartiAcharyaShriShantisagarjiMaharaj in his Acharya tradition. चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर महाराज के प्रथम शिष्य एवं उनकी परम्परा में पटाटाघीश आचार्य ” जन्म – सन १८७६ में आषाढ शुक्ला १५ (गुरु पूर्णिमा ) एवं समाधि – संन १९५७ आश्विन कृ. अमावस ” सन…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रृंखलित – Shrinkhalita. Fettered like standing, an infracting of posture of meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक दोष; बेडी से जक्स्दे मनुष्य की भांति खड़े होना “
त्रिलोकतीज व्रत A type of fasting. तीन वर्ष तक प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल तीज का उपवार करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]