शुद्धात्मस्वरुप!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धात्मस्वरुप – Suddhaatmasavroopa. The absolute form of soul, A synonym word for Mokshmarg (path of salvation). शुद्ध आत्मा का स्वरुप, मोक्ष मार्ग या निर्विकल्प समाधि का अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धात्मस्वरुप – Suddhaatmasavroopa. The absolute form of soul, A synonym word for Mokshmarg (path of salvation). शुद्ध आत्मा का स्वरुप, मोक्ष मार्ग या निर्विकल्प समाधि का अपरनाम “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंत्रसामर्थ्य: Power of mystical words or verses. मंत्र की शक्ति “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्यात् : == नियमनिषेधनशीलो निपातनाच्च य: खलु सिद्ध:। स स्याच्छब्दो भणित:, य: सापेक्षं प्रसाधयति।। —समणसुत्त : ७१५ जो सदा नियम का निषेध करता है और निपात रूप से सिद्ध है, उस शब्द को ‘स्यात्’ कहा गया है। यह वस्तु को सापेक्ष सिद्ध करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयार्धगिरि – Vijayaardha Giri.: A great & beautiful silvery mountain in the middle of Bharat Kshetra (region). भरतक्षेत्र के मध्य स्थित एक रमणीक पर्वत ,यह 25 योजन ऊँचा ,50 योजन चौड़ा और सवा छः योजन गहरा चांदी के सामान है “जम्बूद्वीप में विदेह क्षेत्र सम्बन्धी 32 तथा भरत –ऐरावत क्षेत्र का एक – एक…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंजूषा : Main city of Manglavart country of east Videh region Box. पूर्व विदेह के मंगला व्रत देश की प्रधान नगरी, पेटी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध पारिणामिक भाव – Shuddha Paarinaamika Bhaava. Eternal nature of a matter. अनादिकालीन पारिणामिक स्वभाव; उसका व्यय और उदय नहिन होता किन्तु वह स्थिर रहता है जिसे ध्रौव्य कहते है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंगरस:A kannad poet who wrote ‘Nemi Jineshwar Sangati’ etc. books. नेमि जिनेश्वर संगति और सम्यक्त्व कौमुदी के रचियता एक कन्नड़ कवि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव – स्वभाव – Vibhava – Svabhava. Nature contrary to the real nature. कर्मबंध के प्रकरण में रागादि परिणाम भी अशुद्ध निश्चयनय से जीव के स्वभाव कहे जाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विक्षेपिणी कथा – Vikshepinii Kathaa.: Right religious speech which emphasizes on right principles. 4 धर्मकथाओं में एक धर्मकथा;ऐसी कथाओं से मिथ्यामतों का खंडन किया जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकल्पनय – Vikalpanaya.: One of the standpoints considering soul as man (child ,young or old aged). 47 नयों में एक नय;जो आत्मद्रव्य को बालक ,कुमार ,वृद्ध ऐसे एक पुरुष की भांति सविकल्प मानता है “