दुर्नय!
दुर्नय False standpoint or viewpoint. एक- दूसरे की अपेक्षा न करके एकांत से किसी विषय का प्रतिपादन करने वाला नय जैसे- जीव नित्य ही है। इसे मिथ्यानय भी कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दुर्नय False standpoint or viewpoint. एक- दूसरे की अपेक्षा न करके एकांत से किसी विषय का प्रतिपादन करने वाला नय जैसे- जीव नित्य ही है। इसे मिथ्यानय भी कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
घोड़ा Horse, an auspicious significant, Symbol of the 3rd Tirthankar (Jaina-Lord) Sambhavnath. एक मंगल , तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का चिह्न ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशध- अश्टमी, चतुर्दषी आदि पर्व के दिन उपवास अथवा एक बार भेजन करना। Prosadha- Fasting or one time eating
दुःख निरोध Cessation of sorrow. दुःख का अभाव अथवा दुःख को रोक देना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध स्थान- बंध से जो स्थान निर्मित होता है बन्ध स्थान कहलाता है। Bandha Sthana- The place caused by binding of karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रीतिंकर- कुरुवंष का एक राजा, ऊध्र्व ग्रैवेयक का विमान। Pritimkara- A king of kuru dynesti A heavenly abode of Urdhva graiveyak
दिग्वसतिका Name of a dominion (Sabhabhumi) of Bharat Chakravarti. भरत चक्रवर्ती की 5 वीं विभूति ‘सभाभूमि ’ का नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड् रसी व्रत – Sadrasee Vrata. A particular & procedural vow (fasting) pertaining to renouncement of 6 kinds of particular delicacies. उत्कृष्ट 24 वर्ष, मध्यम 12 वर्ष व जघन्य 1 वर्ष में ज्येष्ठ कृ. 1 से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक कृ. 1 को उपवास, 2-15 तक एकाशन, शु. 1 को उपवास, 2-15 तक एकाशन करना…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधनीय- बन्धयोग्य कर्म और नोकर्म स्कन्ध बन्धनीय कहलाते है। Bandhaniya- karmas causing for binding