संभवचरिउ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवचरिउ – Sambhavachariu. Name of a treatise written by poet Tejapal. कवि तेजपाल द्वारा (ई. 1443) रचित यथनाम विषयक अपभ्रंश ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवचरिउ – Sambhavachariu. Name of a treatise written by poet Tejapal. कवि तेजपाल द्वारा (ई. 1443) रचित यथनाम विषयक अपभ्रंश ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] याज्ञिक मत – संसारी जीव की कभी मुक्ति नहीे होती ऐसा मानने वाला मत। Yajnika Mata-A doctrine believing no salvation of worldly beings
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लेष संबंध – Shlesa Sambandha. Close relation (togetherness). संश्लेष संबंध, परस्पर संबंध को प्राप्त होना, जैसे काष्ठ और लाख का संबंध, दूध और जल का संबंध “
इंद्रिय व्याधि Diseases, Internal deterioration. इन्द्रिय बीमारी इन्द्रिय विषयों में आसक्ति हर्ष विषाद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग्यता – अपने आवरण अर्थात ज्ञान को ढकने वाले कर्म के क्षयोपक्षम को योग्यता कहते है अर्थात सामथ्र्य ज्ञान की अनुरूपता। Yogyata-talent, capability, Competency, Qualification
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतावतार (ग्रंथ) – Shrutaavtaara (Grantha). Name of two different treatises written by Acharya Indranandi & by Acharya Shreedhar. आचार्य इंद्रनंदि (ई.श. 10 -11) द्वारा रचित प्राकृत गाथाबद्ध भगवान महावीर के निर्वाण से 683 वर्ष पर्यंत की मूलसंघ की पट्टावली, आचार्य श्रीधर (ई.श. 14) द्वारा रचित प्राकृतछंदबद्ध ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्तापिधान – Sachittaapidhaana. Covering food with leaf etc. (objects having life), an infraction of vow of hospitality. सचित्त वस्तुओं अर्थात् पत्ते आदि से आहार ढांकना, अतिथि-संविभाग व्रत का एक अतिचार “
दर्शनविशुद्धि Purity of right faith. 16 कारण भावना में पहली भावना सम्यग्दर्शन को अत्यन्त निर्मल व दृढ़ हो जाना। इसके होने पर ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध संभव है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतज्ञानावरण – Shrutgyaanaavarana. Karmas obscuring the Shrutgyaana (scriptual knowledge). ज्ञानावरण कर्म का एक भेद; जो कर्म श्रुतज्ञान को आवरण करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त संबंध आहार – Sachitta Sambandha Aahaara. Taking food mixed with other food articles having life. भोगोपभोगपरिमाण व्रत का एक अतिचार; सचित्त वस्तुओं से सम्बन्ध रखने वाले आहारपान का सेवन करना “