आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति!
आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति Chief and secondary parts of Aharak Sharir. वह नामकर्म प्रकृति जिससे आहारक शरीर बनता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति Chief and secondary parts of Aharak Sharir. वह नामकर्म प्रकृति जिससे आहारक शरीर बनता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जरा अनुप्रेक्षा – Nirjaraa Anuprekshaa. Contmplation on dissociation of karmas निर्जरा में निमित ऐसे अनशन आदि 12 प्रकार के तप का विचार करना “
धर्मचक्री Lord Jinendra having Dharmachakra ahead. जिनेन्द्र देव ; इनके आगे धर्मचक्र चलता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरुद्ध अविचार भक्त प्रत्याख्यान – Niruddha Avichaara Bhakta Pratyaakhyaana. Slow renunciation of food for ritualistic death. सल्लेखना की एक विधि-रोग से पीड़ित हो जाने के कारणजिसका जंघाबल क्षीण हो गया हो, ऐसे मुनि इस विधिपूर्वक समाधि ग्रहण करते है “
धरणेंद्र Name of the governing demigod of Lord Parshvanath. भगवान पाश्रर्वनाथ का शासन यक्ष, जिसने तपस्या करते समय उनका उपसर्ग निवारण किया था।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकार उपयोग – Nirakaara Upayoga . Apprehension of shapelessness. दर्शनोंपयोग; जिसमें आकार रहित पदार्थ का सामान्य आभास होता है ” अर्थात् निश्चयरहित ज्ञान का नाम निराकार उपयोग है “
धनाधीस Kuber, the semi-god of wealth. कुबेर; इन्द्र की आज्ञा से जो तीर्थंकरों के कार्य के 6 माह पूर्व से रत्नवृष्टि एवं समवशरण की रचना करता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवत्सा – Suvatsaa. Name of a country and name of a summit & its governing deity of Trikut Vakshar situated in eastern Videh (region). पूर्व विदेह क्षेत्र का एक देष, कुण्डला नगरी यहाॅं की राजधानी है, पूर्व विदेहस्त त्रिकूट वक्षार का एक कूट व उसका स्वामी देव ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरनुबन्ध योग – Niranubandha Yoga. Activities (reg.mind, speech & body) without binding of new Karmas. बन्ध रहित योग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकविभाग – Lokavibhaaga.: Name of a treatise written by saint Sarvnandi. सर्वनंदी कृत एक ग्रंथ ,जिसमे लोक के स्वरूप का वर्णन है “समय –ई. 458 “