बहुविध मतिज्ञानावरण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध मतिज्ञानावरण- बहुविध मतिज्ञान पर आवरण करने वाला कर्म। Bahuvidha Matijnanavarana- An occurring Karma of sensory knowledge
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध मतिज्ञानावरण- बहुविध मतिज्ञान पर आवरण करने वाला कर्म। Bahuvidha Matijnanavarana- An occurring Karma of sensory knowledge
उक्त अवग्रह Expressed apprehension. मतिज्ञान का एक भेद कहे हुए पदार्थ का ग्रहण होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्षेप सम्यक्तवार्य – Sankshepa Samyaktvaarya. See – Sankshepa Darshanaarya. देखें – संक्षेप दर्शनार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध – हासिल प्राप्त किया गया । Labdha-Quotient-Attained something
दर्शन विशुद्धि व्रत A Jaina vow (fasting) with particular procedure. औपशमिकादि तीनों सम्यत्तवों के आठ अंगों की अपेक्षा 24 अंग के एक उपवास एक पारणा के क्रम से 24 उपवास करना एंव णमोकार मंत्र का जाप करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिगवलोकन An infraction of meditative relaxation (Kayotsarga) (to watch in all directions). कायोत्सर्ग का एक अचिार, आठों दिशाओं की तरफ देखना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध समुत्पत्तिक- जिन सत्कर्म स्थानों की उत्पत्ति बन्ध से होती है, उन्हें बन्ध समुत्पत्तिक कहते है। Bandha Samutpattika- meritorious places caused due to binding of karmas
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्युज्जिव्ह – Vidyujjivha. One of the (the 34th ) 88 planets. ज्योतिष्क के ८८ ग्रहों में ३४वां ग्रह “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षोडशकारण भावना – Sodashakaarana Bhaavanaa. Sixteen spiritual reflections (sentiments causing to be Tirthankar(Jaina-Lord)). तीर्थंकर प्रकृति की कारणभूत दर्शनविशुद्धि आदि 16 भावनाएं ” दर्शन विशुद्धि, विनय संपन्नता, शीलव्रतों में अनतिचार (शीलव्रतेष्वनतिचार), अभीक्ष्णज्ञानोपयोग, संवेग, शक्तिस्ततप, शक्तितस्त्याग, साधु समाधि, वैयावृत्यकरण, अर्हंत भक्ति, आचार्यभक्ति, बहुश्रुत भक्ति, प्रवचन भक्ति, आवश्यक अपरिहाणि, मार्ग प्रभावना एवं प्रवचन वत्सलत्व “