पद्धतिटिका!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्धतिटिका: A book written by Acharya kund-kund. आचार्य कुन्द-कुन्द (ई0 127-179) द्वारा कषाय पाहुड तथा षट्खंडागम की टीका ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्धतिटिका: A book written by Acharya kund-kund. आचार्य कुन्द-कुन्द (ई0 127-179) द्वारा कषाय पाहुड तथा षट्खंडागम की टीका ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यदुवंश–Yaduvansh. The other name of Yadav dynasty. यादववंश; जिसकी उत्पत्ति हरिवंश के एक राजा ‘यदु’ से हुई”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरावरण – Niraavarana. Univeiling, Uncovered. आवरण से रहित (केवल ज्ञान), मुनियों के द्वारा बिना आवरण के शयन करना कायक्लेश तप का एक लक्षण है”
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदसाहित्य: Name of aphilosopical book. ई0 सन 1724.32 में अध्यात्म पद विषयक रचित एक ग्रंथ ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष गुण – Vishesha. Guna. Special characteristics recognizable properties of matter. जिस गुण से द्रव्यों में भेद जाना जाता है अर्थात् विशेष गुणों के द्वारा द्रव्य विशेष सिद्ध किया है ” सर्वद्रव्यों में विशेष गुण १६ हैं “
देवावर्णवाद False allegations for heavenly deities. दर्शनमोहनीय कर्म के आस्रव का एक कारण स्वर्गलोक में रहने वाले देवी- देवता सुरापान करते हैं , मांस खाते हैं इस प्रकार देवगति के देवों पर मिथ्या आरोप लगाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पत्रचार ऋद्वि:A type of supermatural power of unviolennceful passing through leves (related to Jaina saints). दिगम्बर जैन मुनियों को प्राप्त होने वाली एक ऋद्वि जिसके प्रभाव से पत्तों आदि में रहने वाले जीवों की विराध्ना न करके उनके ऊपर से मुनिगण जा सकते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैनासुंदरी–Mainasundri. Name of a great pious lady in the Jain history. राजा पहुपाल की पुत्री, जिसे क्रोध के वश पिता ने श्रीपाल कुष्टी के साथ विवाह दी” गंधोदक द्वारा पति का कुष्ट दूर किया आयर अन्त में दीक्षा ली”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकादित्य –Lokaditya : Name of a king contemporary to Akaalvarsh. उत्तरपुराण की प्रशस्ति अनुसार अकालवर्ष के समकालीन एक राजा, आचार्य लोकसेन ने इनके समय में ही उत्तरपुराण को पूर्ण किया “समय –ई .898 “