ऋजुत्व!
ऋजुत्व To be well versed in telepathic knowledge (Manah Paryaya Gyan). यर्थात मन, वचन और कायिक चेष्टागत होने से ऋजुमति मन पर्ययज्ञान में ऋजुत्वपना है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋजुत्व To be well versed in telepathic knowledge (Manah Paryaya Gyan). यर्थात मन, वचन और कायिक चेष्टागत होने से ऋजुमति मन पर्ययज्ञान में ऋजुत्वपना है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सात भय – Saata Bhaya. Seven kinds of fears. इहलोक, परलोक, अरक्षा, अगुप्ति, मरण, वेदना और आकस्मिक भय ये सात भय है
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूक्मि कूट – रूक्मि पर्वत के 8 कूटों में एक कूट। Rukmi (kuta)-name of a summit of Rukmi Mountain
झूठ- मर्मच्छेदी पुरूषवचन, उद्वेगकारी कटुवचन, वैरोत्पादक, भयोत्पादक, तथा अवज्ञाकारी वचन इस प्रकार के वचन अप्रिय हैं तथा हास्य भीति लोभ क्रोध द्वेष इत्यादि कारणों से बोले जाने वाले वचन सब झेठ (असत्य) हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युधिश्ठिर – कुरूवंषी राजा पाण्डु व कुन्ती का ज्येश्ठ पुत्र, षत्रुंजय गिरि से निर्वाण प्राप्त किया। Yudhisthira- a son og king ‘pandu’ related to kuru dynasty
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यलोक- Manushya Loka. Human universe. देखें – मनुष्य क्षेत्र “
एलेय A king of Hari dynasty. हरिवंश के राजा दक्ष का पुत्र, अंत में दीक्षा धारण की।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लंघन – किसी कारणवष भोजन का त्याग कर देना लंघन है तथा विशय कशाय व आरम्भ का जहां संकल्पपूर्वक ध्यान किया जाता है वह उपवास हैं Lamghana-Food renunciation
उभयबंधी प्रकृति A type of Karmic nature having bilateral bindings. जिस प्रकृति का बंध सान्तर-निरन्तर अथवा सप्रतिपक्षी और निष्प्रतिपक्षी होता है उसे उभयबन्धी प्रकृति कहते हैं। जैसे देवगति आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नत्रयकथा – आचार्य पùनंदी (इ्र, 1280 – 1330) कृत एक संस्कृत ग्रंथ Ratnatrayakatha-Name of a boom written by acharya Padmanandi