मैत्रीभाव!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैत्रीभाव–Maitribhav. Friendly or amicable nature. मैत्री, प्रमोद, कारुण्य, मध्यस्थ इन 4 भावनाओ में प्रथम भावना, प्राणीमात्र के प्रति मैत्रीभाव रखना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैत्रीभाव–Maitribhav. Friendly or amicable nature. मैत्री, प्रमोद, कारुण्य, मध्यस्थ इन 4 भावनाओ में प्रथम भावना, प्राणीमात्र के प्रति मैत्रीभाव रखना”
दोष Faults. त्रुटि , कमी, रागद्वेष आदि 18 दोष; अरिहंट परमात्मा इनसे रहित होते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भेरीताडन विधि :A type of auspicious act of singing musical instruments and raising the flags of different colours in all 10 directions before beginning of Panchkalyanak Pratishta. (celebration for the installation of jain idols in temples). इस विधि में पंचकल्याण प्रतिष्ठा से एक-दो आदि दिन पूर्व प्रतिष्ठाचार्य मंत्रोच्चारपूर्वक यजमान द्वारा विविध प्रकार के…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्पुरुष : == दट्ठूण अण्णदोसं, सप्पुरिसो लज्जिओ सयं होइ। —भगवती आराधना : ३७२ सत्पुरुष दूसरे के दोष देखकर स्वयं में लज्जा का अनुभव करता है। (वह कभी उन्हें अपने मुंह से नहीं कह पाता)।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबद्ध – Pratibaddha. Tied, Bound, Restricted. बंधा हुआ, जोड़ा गया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिपक्ष – Pratipaksha. Rival party, Rival view, opponent. विरोधी धर्म अथवा पक्ष “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूति – Bhuti. Name of the 24th chief disciple of Lord Rishabhadev. भगवान वृषभदेव के ८४ गणधरों में २४ वें गणधर का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिक्रमण – Pratikramana. Penitential retreat, Expiatory recitals. प्रमाद के द्वारा किये दोषों का निराकरण करना अर्थात् लगे हुए दोषों की विशुद्धिजिसके द्वारा होती है वह प्रतिक्रमण है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पवती स्त्री – Puspavati Stri. Mensturous Woman. मासिक धर्म वाली स्त्री अर्थात् रजस्वला स्त्री. तीन दिन के अशौच काल में महिलाओं को किसी का भी स्पर्श करना वर्जित है, चतुर्थ दिवस स्नान के बाद घर के काम आदि के लिए शुध्द होती हैं लेकिन पूर्ण शुध्दि के पश्चात् ही पूजन- आहारदान का अधिकार होता…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पक – Puspaka. Name of the 3rd Indrak & Patal (layer) of Anata Pranar heaven, Name of the forest where Tirthankar (Jaina-Lord) Pushpadantnath got initiation as well as omniscience. आनत प्रणाम स्वर्ग का तृतीय पटल व् इंद्रक, तीर्थंकर पुष्पदंतनाथ के दीक्षा एवं केवलज्ञान वन का नाम “