चतुरिन्द्रिय जाति नामकर्मप्रकृति!
चतुरिन्द्रिय जाति नामकर्मप्रकृति A type of Karmic nature causing four sensed beings. नामकर्म की एक प्रकृति ; जिसके उदय से जीव ४ इन्द्रिय कहा जाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुरिन्द्रिय जाति नामकर्मप्रकृति A type of Karmic nature causing four sensed beings. नामकर्म की एक प्रकृति ; जिसके उदय से जीव ४ इन्द्रिय कहा जाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्पर्श – Bhava Sparsa. Sensible touch for any knowledgeable matter. निक्षेप रूप एक भेद; जो स्पर्श प्राभृत का ज्ञाता उसमें उपयुक्त है वह सब भाव स्पर्श है \
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकर्माहार – Nokarmaahaara. See – Nokarma Aahaara. देखें – नोकर्म आहार “
उद्योतकर One who creates light, A founder of judicial literary. उद्योत (प्रकाश) करने वाला नैयायिकमत के एक साहित्य प्रवर्तक।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वत्सावती –Vatsaavatii: A region of eastern Videh Kshetra (region), Name of a summit of Vaishravan Vakshar (mountain) in eastern Videh kshetra (region) & its female divinity. पूर्व विदेह का एक क्षेत्र ,पूर्व विदेह के वैश्रवण वक्षार का एक कूट व उसकी स्वामिनी देवी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगवान् – Bhagavan. Supreme one, Lord, one with omnipotence & omniscience. जो सर्वशक्तिमान एंव केवल ज्ञान से सहित है वह भगवान है “
थलचल Animals living on Land terrestrial. पंचेन्द्रिय तिर्यंचों के 3 भेदों में एक भेद, धरती पर चलने वाले तिर्यंच जीव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्र –ऋषभनाराच संहनन – Vajra-Rishabhnaaraacha sanhanana. An osseous structure, a type of bone joints (Karmas making body very strong). 6 संहनन में प्रथम संहनन ,जिस कर्म के उदय से शरीर में वज्र के समान नसों का जाल , कीलों व हड्डियां होती है ” तीर्थंकर आदि तदभव मोक्षगामी जीवों के यह संहनन होता है…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैमिष – Naimisha. A city in thr north of Vijayrdh mountain. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर “
त्रुटितांग A time unit. काल का एक प्रमाण , 84 लाख कमल प्रमाण काल। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]