उभयोदयबंधी प्रकृति!
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसंत – Vasanta. : Another name of Sumeru mountain. सुमेरुपर्वत का अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्षलक्ष – Varshalaksha.: A time period of 1 lac years. काल का प्रमाण; वर्षशतसहस्त्र (एक लाख वर्ष ) “
उपघात नामकर्म प्रकृति A type of karmic nature (reg. harming self). जिस कर्म के उदय से अपने अंगों से अपना घात हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्तना – Vartanaa.: Continuous inperceptible minute changes in any matter. द्रव्य के प्रति समय होने वाले परिवर्तन अर्थात प्रत्येक द्रव्य प्रत्येक पर्यायमें प्रति समय जो स्वसत्ता की अनुभूति करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचकल्याणक वंदना – Panchakalyaanaka Vandanaa. Devotional celebration of five auspicious events of the life of Tirthankars (Jaina Lord). कृतिकर्म; भगवान के गर्भ, जन्म आदि पांचों कल्याणक की सिद्ध आदि भक्ति पाठ के साथ वन्दना करना “
उपक्रम An initial stage, Undertaking, A type of persuance in accordance with natural matters. किसी कार्य को प्रारम्भ करना प्रकृत- पदार्थ को श्रोताओं की बुद्धि में बैठा देना उपक्रम है इसका दूसरा नाम उपोद्धात भी है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूर्यग्रहण – Suryagrahana. Solar eclips. जैन भूगोल के अनुसार सूर्य और पृथ्वी के बीच में केतु ग्रह का मिान आ जाने पर सूर्य का ढॅंक जाना सूर्यग्रहण कहलाता है। यह प्रत्येक छह महीने में अमावस्या के दिन होता है। सूर्यग्रहण के समय कोई शुभ कार्य नही किये जाते है।