भुतविषय नय!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धान प्रायश्चित – Shraddhaana Praayashchita. Repentance over false belief with acceptance of right belief. मिथ्यात्व को प्राप्त होकर स्थित हुए जीव के महाव्रतों को स्वीकार कर आप्त, आगम और पदार्थों का श्रद्धान करने पर श्रद्धान नाम का प्रायश्चित होता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा लब्धि :Synonym of Shruggyan (scriptural knowledge.) श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलमति – Vipulamati. A type of telepathic knowledge (Manah Paryay Gyan). मन: पर्यय ज्ञान के दो भेदों में दूसरा भेद; जो ज्ञान दूसरे के मन में स्थित सरल और कुटिल सब बातों को जान लेता है ” अर्थात् चिन्तित, और अर्ध – चिन्तित को भी जान लेता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवेश मण्डप- प्रवेष द्वार। Pravesa mandapa- Entrance, vestibules porch
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्जरा : == बंधपदेशग्गलणं निज्जरणं इदि जिणेहिं पण्णत्तं। जेण हवे संवरणं तेण दुणिज्जरणमिदि जाणे।। —वारस अणुवेसवा : ६६ बंधे हुए कर्म—प्रदेशों के क्षरण को निर्जरा कहा जाता है। जिन कारणों से संवर होता है, उन्हीं कारणों से निर्जरा होती है। यथा महातडागस्य, सन्निरुद्धे जलागमे। उत्सिंचनया तपनया, क्रमेण शोषणा…
चंद्रमाल Name of a mountain (Vakshargiri) in the western Videh. पश्र्चिम विदेह का एक वक्षारगिरि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान प्रवाद- pratyakhyana pravada A part of scriptural knowledge (9th purva) pertaining to code of renunciation. 14 पूर्वो में 9 वां पूर्व; इसमें 84 लाख पद हैं एवं द्रव्य क्षेत्र आदि की अपेक्षा यम-नियमरुप त्याग का कथन है।