देवच्छंद!
देवच्छंद A special place (Garbhgrah) in natural (eternal) temples. अकृत्रिम चैत्यालयों के एक विशेष स्थान का नाम (गर्भगृह)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवच्छंद A special place (Garbhgrah) in natural (eternal) temples. अकृत्रिम चैत्यालयों के एक विशेष स्थान का नाम (गर्भगृह)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वाफाल्गुनी – Purvaphalguni. Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम “
देवगति (देव सामान्य) Celestial form, Divine life course. संसार परिभ्रमण की 4 गतियों (देव, नारकी, मनुष्य, तिर्यंच) में से एक गति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ख The second consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी लिपि का दूसरा व्यंजन अक्षर , इसका उच्चारण स्थान कंठ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]] अथवा Sky, Sense organ, Infinite. आकाश, इन्द्रिय, अनंत या अनंता की अपेक्षा सहनानी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यंत्रेशयंत्र–Yantresa yantra. A metallic plate engraved with some auspicious mystic diagram & words. एक विशेष यंत्र; यंत्रेश मंत्र की विभिन्न रेखाक्रतियो में चित्रित रचना”
खट्वांङ्ग Human skull placed on a bone (symbol of a terrific divinity). एक हड्डी पर मानव खोपड़ी का होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु : == सं किं गुरु: पिता सुहृदा योऽभ्यसूययाऽर्भं बहुदोषम्, बहुषु वा दोषं प्रकाशयति न शिक्षयति च।। —नीतिवाक्यामृत : ११-५३ वे गुरु, पिता व मित्र निन्दनीय या शत्रु सदृश हैं, जो ईष्र्यावश अपने बहुदोषी शिष्य, पुत्र व मित्र के दोष दूसरों के समक्ष प्रकट करते हैं और उसे…
दूरास्वादित्व ऋद्धि Super distantial attainment of taste. जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को रसना इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित खटटे, मीठे आदि अनेक प्रकार के रसों का स्वाद लेने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]