सर्वजय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वजय – Sarvajaya. Name of the son of Vidyadhar Vinami. विद्याधर विनमि का पुत्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वजय – Sarvajaya. Name of the son of Vidyadhar Vinami. विद्याधर विनमि का पुत्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगपरिशहजय – 22 परिशहो में एक परिशह, असाध्य पीडा को उसके प्रतिकार की कामना रहित होकर साधु द्वारा समतापूर्वक सहन करना। रोग परिशह जय कहलाता हैं। Rogaparisaha Jaya-To bear afflictions of disease
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सरस्वती – Sarasvatee. Goddess of learning, Resonant preaching of Tirthankars (Jaina-Lords), mother’s name of the 11th Jaina-Lord of Videh (region), the female beloved divinity of an Indra in peripatetic deities of Gandharva type. विद्या की देवी, द्वादशांग जिनवाणी के प्रतीक रुप मे देवी के आकार की सरस्वती की मूर्ति जैन आगम मे मान्य है।…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध राशि – प्राप्त की गई राषि। Labdha rasi-Gained amount or quantity of something
चालिसिय A type of conduct deluding Karmas. चारित्र मोहनीय ; ४० कोटाकोटी स्थिति वाले बंध चालिसिय कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिभुवनस्वयंभू Son of the poet Svayambhu. कवि स्वयंभू के पुत्र जिसने वृहत्सर्वज्ञसिद्धि की रचना की । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोमज वस्त्र – वस्त्र के पांच प्रकारो अंडज, वोडज, रोमज, वक्कज, चर्मज में एक प्रकार, उन से बने वस्त्र। Romaja (vastra)-Woolen clothes
च्युत शरीर Expired body. कदलीघात मरण के बिना कर्म के उदय से झड़ने वाले आयुकर्म के क्षय से अपने आप पतित शरीर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्श निक्षेप – Sparssana Niksepa. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।