निदान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निदान-भोगों की तृष्णा से पीडित होकर रातदिन आगामी भोगों को प्राप्त करने की ही चिन्ता करते रहना निदानज नामक आर्त्तध्यान है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निदान-भोगों की तृष्णा से पीडित होकर रातदिन आगामी भोगों को प्राप्त करने की ही चिन्ता करते रहना निदानज नामक आर्त्तध्यान है”
आसादन Death of demoralized saints. ज्ञानवरणीय- दर्शनावरणीय कर्म के आस्रव का कारण जो ज्ञान का प्रकाश कर रहा है। तब शरीर या वचन से उसका निषेध करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य द्रव्यमल – Bahya Dravyamala. Excreting materials of the body. स्वेद , मल , रेणु , कर्दम इत्यादि बाह्य द्रव्यम्ल कहलाते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवसु – Suvashu Name of a king of kuru dynasty. कुरूवंशी एक राजा । यह राजा वसु का 9 वाँ पुत्र था ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतग्राही नय – Bhutagrahi Naya. Standpoint showing knowledge of past. नय; जिसके अनुसार जन्म से १५ कर्मभूमियों में और संहरण की अपेक्षा सर्व मनुष्य क्षेत्र से सिध्दी होती है ” अर्थात् भूतकाल को ग्रहण करके कथन करने वाला नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराहारता – Niraahaarata. To be foodlessness-an excellence of Lord Arihant (free From hunger). भोजन का abhaअभाव; अर्हत् भगवान के केवलज्ञान का एक अतिशय “
एकान्त वृद्धावृद्धि One sided increase in purity. देश संयत पंचम गुणस्थान के प्रथम समय से लगाकर अंतर्मुहूर्त पर्संत अनंतगुणी विशुद्धता का बढ़ना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहार वर्गणा Physique making Karmic nature causing complete formation of the body. देखें-आहारक वर्गणा।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरेश्वर – Sureshvara. The disciple of Shankaracarya, the writer of ‘Naishkarmya Sidhi’and other treatises. शंकराचार्य के शिष्य (समय-ई0 820), इन्होने नैष्कर्म्य सिद्धि, वृहदारण्यक उपनिषद भाष्य ग्रंथ लिखे है।
[[श्रेणी :शब्दकोष ]] मिश्र उपचारित असद्भूत व्यवहार नय–Mishra Upcharit Asdbhuut Vyavahar Nay. A type of standpoint related to considering ownness in different object as town, state, country etc. राज्य, दुर्ग, नगर आदि जो बिलकुल भिन्न मिश्र जीव पदार्थ है उनको जिस नय से अपना माना जाय”