पुन्नात संघ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुन्नात संघ – Punnata Samgha. A group of Acharyas formed by Acharya Arhadvali. आचार्य अर्हव्दलि द्वारा स्थापित मुनियों के एक संघ का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुन्नात संघ – Punnata Samgha. A group of Acharyas formed by Acharya Arhadvali. आचार्य अर्हव्दलि द्वारा स्थापित मुनियों के एक संघ का नाम “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेघचंद्र–Meghachndra. Name of many Jain Acharyas. कई जैनाचार्य के नाम” नंदिसंघ बलात्कार गण में माणिक्य नंदी के शिष्यतथा शांति कीर्ति के गुरु (समय–शक601–627). नंदिसंघदेशीयगण में सकलचन्द्र के शिष्य वीरनंदी तथाशुभचंद्र के गुरु (समय– ई. 1020–1110)”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल विपाकी कर्म प्रकृति – Pudgala Vipaki Karma Prakrti. A type of Karmic nature, result of which is related to the body of one (these are 62 in number). जिस कर्म का फल पुद्गल (शरीर) में होता है ऐसी ६२ कर्म प्रकृतियाँ पुद्गल विपाकी हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भास्करश्रवण – Bhaskarasravana. The other name of kumbhkarana. कुंभकर्ण का दूसरा नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यास्त्रवकथाकोष – Punyanubamdhi Punya. A book written by Pandit Ramchandra. ई.श.१३ के मध्यपाद में पं. रामचंद्र द्वारा रचित एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वानरद्वीप –Vaanaradviipa.: Name of an island of Lanka. लंका का रमणीय एवं सुरक्षित द्वीप ,रक्षक वंशी राजा कीर्तिध्वज ने यह द्वीप अपने साले श्रीकंठ को दिया था ” श्रीकंठ ने इसी द्वीप के किष्कु पर्वत पर किष्कुपुर नगर बसाया था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंडरीकिणी नगरी – Pumdarikini Nagari. Name of a main city of Pushkalavani of the east Videh Kshetra (region). पूर्व विदेह स्थित पुश्क्लावर्त की मुख्य नगरी. अपरनाम- पुष्कलावती “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद-विवाद – Vaad-Vivaada.: Debate,Mutual discussion,Argumentation. अपने पक्ष का प्रमाण से स्थापना करना वाद एवं दूसरे के मत को खंडन करने वाले वचन कहना विवाद है “
उत्तम स्थान Salvation, The supreme place. सर्वोत्तम श्रेष्ठ स्थान मोक्ष।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र (देव) – Shukra (Deva). An Indra of Shukra- Mahashukra heavens. शुक्र – महाशुक्र कल्प युगल का इन्द्र “