वैजयंत स्वर्ग!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैजयंत स्वर्ग –VaijayaintaSavrga. The forth heavenly abode of among 5 Anuttars (heavens). ५ अनुत्तरों में चौथा उत्तर दिशा का विमान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैजयंत स्वर्ग –VaijayaintaSavrga. The forth heavenly abode of among 5 Anuttars (heavens). ५ अनुत्तरों में चौथा उत्तर दिशा का विमान “
जम्बूस्वामीचरित्र Name of a book written by Pandit Rajmalla. पं. राजमल (ई. १५७५-१५९३) द्वारा रचित संस्कृत काव्य , इसमें २४०० पद एवं १३ सर्ग हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ठकाप्पा (कवि) Name of a Marathi poet. एक मराठी कवि जिन्होंने पाण्डव पुराण की रचना की । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
दधिमुख Name of particular 16 mountains in Nandishvardvip (island). नंदीश्वर द्वीप की 16 वापियों के मध्य स्थित दही के समान 16 सफेद वर्ण के पर्वत। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेद कषाय –Veda Kasaya Passion of lust. नोकषाय, चरित्र मोहनीय के उदय से आत्मा मे कामसेवन या स्त्रीत्व, पुरुषत्व, नपुंसकत्व के भाव”
छिद्र(घटाछिद्र) Hole, opening, A type of listener, totally unable to understand any preaching. छेद, श्रोता का एक भेद- जिसके हृदय में कुछ भी उपदेश नहीं ठहरे ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वानशन – Sarvaanashana. A type of great austerity pertaining to renunciation of food upto holy death. अनषन तप के दो भेदों में एक भेद, मरण समय में अर्थात् सन्यास काल में मुनि सर्वानषन तप करते है। भक्तप्रत्याख्यान, इंगिनीमरण, प्रायोपगमनमरण अथवा अन्य भी अनेकों प्रकार के मरणों में जो मरण प्र्यत आहार का त्याग करना…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद:Designation or title. A part of scriptural Knowledge (Shrutgyan). उपाधि अथवा पदवी, श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 5 वां भेद, इनके अर्थ पद, प्रमाण पद और मध्ष्यम पद तीन भेद ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यतिरेक – Vyatireka. Distinction, Reaching beyond, a type separateness. भेद, अंतर, वैषम्य या असमानता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतेश – Bhutesha. Name of an Indra (celestial being). भवनवासी देवों के २० इन्द्रों में तीसरा इंद्र “